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Mukhiya Shayari

Dukhiya se mukhiya banne tak ka poora chunavi safar.

Mukhiya shayari gaon ke chunav ki wahi kahani dohrati hai, jeetne se pehle sabke ghar dukhiya bankar jaana, jeetne ke baad mukhiya bankar jankata par nakel kasna. Isi tarah ke sher Chunav shayari mein bhi milenge.

Mukhiya Shayari - Gaon Ke Mukhiya Par Sher

हर-चंद एतबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए !!

Har-chand etabaar mein dhoke bhee hain magar
Ye to nahin kisee pe bharosa kiya na jae !!

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आप भी सुनिए नेता जी क्या-क्या कह रहे हैं,
दौरे तरक्की में भी दर्द गरीब ही सह रहे हैं !!

Aap bhi suniye neta jee kya-kya kah rahe hain,
Daure tarakkee mein bhee dard gareeb hee sah rahe hain !!

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बड़ा महँगा हर सामान का भाव हो जाता है,
जब हमारे देश में सम्पन्न चुनाव हो जाता है !!

Bada mahanga har saman ka bhaav ho jaata hai,
Jab hamaare desh mein sampann chunaav ho jaata hai !!

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प्यार से केवल बोलते है, दिल से नही कोई मेल,
जीतने के बाद मुखिया जी जनता पर कसते है नकेल.

Pyaar se keval bolate hai, dil se nahee koee mel,
Jeetane ke baad mukhiya jee janata par kasate hai nakel.

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Chunav Shayari

ये जो मुखिया का पद है,
गाँव में इसका बड़ा कद है.

Ye jo mukhiya ka pad hai,
Gaanv mein isaka bada kad hai.

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जीतने से पहले सबके घर दुखिया बनकर जाते है,
चुनाव जीतने के बाद सबके घर मुखिया बनकर जाते है.

Jeetane se pahale sabake ghar dukhiya banakar jaate hai,
Chunaav jeetane ke baad sabake ghar mukhiya banakar jaate hai.

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दुःख दर्द आये हमको, तो दुखिया बना लिया
सुख अपना बाँट करके, सुखिया बना दिया
सुख दुःख में साथ यूँ ही, सदा आपका मिले
हम सबने आज आपको, मुखिया बना लिया।

Duhkh dard aaye hamako, to dukhiya bana liya
Sukh apana baant karake, sukhiya bana diya
Sukh duhkh mein saath yoon hee, sada aapaka mile
Ham sabane aaj aapako, mukhiya bana liya.

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Frequently Asked Questions

मुखिया जी की जीतने के बाद बदल जाने वाली आदत पर कौन सी शायरी है?
इस टॉपिक की सबसे अलग पहचान बनाने वाली पंक्ति है "प्यार से केवल बोलते है, दिल से नही कोई मेल, जीतने के बाद मुखिया जी जनता पर कसते है नकेल", जिसमें चुनाव जीतने के बाद रवैये में आए बदलाव को नकेल कसने जैसे तीखे बिंब से दिखाया गया है। चुनावी वादों की ऐसी हकीकत चुनाव शायरी में भी पढ़ी जा सकती है।
महंगाई और चुनाव को जोड़कर मुखिया पर कौन सी शायरी लिखी गई है?
"बड़ा महँगा हर सामान का भाव हो जाता है, जब हमारे देश में सम्पन्न चुनाव हो जाता है" पंक्ति में यह तंज कसा गया है कि चुनाव के मौसम में महंगाई भी अपने आप बढ़ जाती है। इस तरह के व्यंग्य से भरे मौके पर इलेक्शन शायरी भी इसी सोच को आगे बढ़ाती है।
नेताजी के भाषणों और गरीबों के दर्द पर क्या शायरी लिखी गई है?
"आप भी सुनिए नेता जी क्या-क्या कह रहे हैं, दौरे तरक्की में भी दर्द गरीब ही सह रहे हैं" पंक्ति में तरक्की के भाषणों के बीच आम गरीब जनता की तकलीफ को उजागर किया गया है। जनता के इस दर्द से जुड़ी दर्द भरी शायरी भी इस टॉपिक के मूड से मेल खाती है।
क्या मुखिया शायरी में भरोसे को लेकर भी कोई बात कही गई है?
हां, "हर-चंद एतबार में धोके भी हैं मगर ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए" पंक्ति में यह सीख दी गई है कि कुछ धोखों के बावजूद भरोसा करना पूरी तरह छोड़ देना सही नहीं। जनता के इस उलझे भरोसे और दुख से जुड़ी बात दुखिया शायरी में भी दिखती है।
मुखिया जी की सियासत को गांव-घर की जिंदगी से क्यों जोड़ा जाता है?
मुखिया का सीधा रिश्ता गांव और घर-परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी से होता है, इसलिए उनकी सियासत का असर सीधे लोगों के घर तक पहुंचता है, जैसे नकेल कसने वाली पंक्ति में जनता पर पड़ने वाला बोझ झलकता है। घर-परिवार से जुड़ी ऐसी बातें घर शायरी में भी पढ़ी जा सकती हैं।

Ek sher yahan dukh-sukh baantne wale rishte ko mukhiya banane ki dua jaisa bhi dikhata hai, jo tanz ke beech ek narmi ka pal deta hai. Aur padhein Dukhiya aur Dil shayari.