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Namak Shayari

Zindagi bhi namak jaisi hai, sab apne swad se chakhte hain.

Namak shayari zindagi ke khatte-namkeen sach ko mazedaar andaz mein pesh karti hai, kabhi ghaav par chhidakne wale namak ki baat, kabhi rishton ke swad ki. Isi mizaaj ke liye 2 Line shayari bhi padh sakte hain.

Namak Shayari - Zindagi Ke Namkeen Sher

खाने में नमक स्वाद के अनुसार,
अकड़ औकात के अनुसार ही अच्छा लगता हैं.

Khaane mein namak svaad ke anusaar,
Akad aukaat ke anusaar hee achchha lagata hain.

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अपना दर्द सबको न बताएं साहब,
मरहम एक आधे घर में होता है, नमक घर घर में होता है।

Apana dard sabako na bataen saahab,
Maraham ek aadhe ghar mein hota hai, namak ghar ghar mein hota hai.

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नमक पर जीएसटी में कोई टैक्स नहीं है,
दिल खोल के दूसरों के जख्मों पर छिड़किए....!!

Namak par jeeesatee mein koee taiks nahin hai,
Dil khol ke doosaron ke jakhmon par chhidakie....!!

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जो लोग बहुत मीठे होते है...
वो किस्से अक्सर नमकीन दे जाते है...!!

Jo log bahut meethe hote hai...
Vo kisse aksar namakeen de jaate hai...!!

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2 Line Shayari

में ज़ख़्म हूँ, जाकर गले लगूँ किस से...!!
नमक से तर कपडे, यहाँ पहने हैं सभी ने...!!

Mein zakhm hoon, jaakar gale lagoon kis se...!!
Namak se tar kapade, yahaan pahane hain sabhee ne...!!

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कुछ तो नमक है तेरे इश्क मे मेरी जान ...।।
ये जायका मेरी जुबां से जाता ही नहीं...।।

Kuchh to namak hai tere ishk me meree jaan .....
Ye jaayaka meree jubaan se jaata hee nahin.....

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नमक की तरह हो गयी है जिंदगी,
लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं !!!

Namak kee tarah ho gayee hai jindagee,
Log svaadaanusaar istemaal kar lete hain !!!

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Frequently Asked Questions

"नमक" संग्रह की पहली शायरी में क्या गहरी सीख दी गई है?
यह शायरी नमक की मात्रा को इंसान की अकड़ से जोड़ते हुए गहरी बात कहती है - "खाने में नमक स्वाद के अनुसार, अकड़ औकात के अनुसार ही अच्छा लगता हैं." इसका मतलब है कि जैसे खाने में नमक सही मात्रा में ही स्वादिष्ट लगता है, वैसे ही इंसान का अभिमान भी उसकी असल हैसियत जितना ही शोभा देता है, उससे ज्यादा नहीं। ऐसी ही समझदारी भरी बातें Log में भी मिलेंगी।
संग्रह में मरहम और नमक की तुलना करने वाली कोई शायरी है?
हाँ, एक मार्मिक शायरी कहती है - "अपना दर्द सबको न बताएं साहब, मरहम एक आधे घर में होता है, नमक घर घर में होता है।" यह बताती है कि दर्द पर मरहम लगाने वाले कम मिलते हैं, जबकि जख्मों पर नमक छिड़कने वाले हर घर में मिल जाते हैं। मदद और सहायता की भावना से जुड़ी शायरियों के लिए Daan देखें।
क्या इस संग्रह में कोई हास्य-व्यंग्य वाली शायरी भी है?
बिल्कुल, एक मजेदार शायरी जीएसटी को लेकर व्यंग्य करती है - "नमक पर जीएसटी में कोई टैक्स नहीं है, दिल खोल के दूसरों के जख्मों पर छिड़किए....!!" यह मौजूदा टैक्स व्यवस्था का मजाकिया इस्तेमाल करते हुए यह तंज कसती है कि लोग बेझिझक दूसरों को ताना मारने से नहीं चूकते। ऐसी नोकझोंक वाली शायरियाँ Ham में भी पढ़ें।
मीठे स्वभाव वाले लोगों पर संग्रह में क्या टिप्पणी है?
एक छोटी दो-पंक्ति वाली शायरी कहती है - "जो लोग बहुत मीठे होते है... वो किस्से अक्सर नमकीन दे जाते है...!!" यह बताती है कि जो लोग ऊपर से बहुत मीठे और विनम्र दिखते हैं, अक्सर उनकी असली कहानियाँ या स्वभाव उतना ही तीखा निकलता है। ऐसी संक्षिप्त पर करारी शायरियों के लिए 2 Line देखें।
इस पूरे संग्रह से "नमक" शब्द के बारे में क्या समझ मिलती है?
यह संग्रह "नमक" को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि इंसानी स्वभाव, अकड़, ताना मारने की आदत और विरोधाभासी व्यक्तित्व के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करता है। मौज-मस्ती भरी और शायरियों के लिए King भी पढ़ सकते हैं।

Kuch sher yahan halke tanz ke saath likhe gaye hain, jaise namak par GST ka mazakiya jikr, to kuch mohabbat ke namak ki baat karte hain. Aur dekhein Ham aur Daan shayari.