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Dupatta Shayari

Dupatta sirf kapda nahi, izzat aur yaad bhi hota hai.

Dupatta shayari mein garibon ke ghar mein bhi dupatta fata ho par sar par zaroor hota hai, aisi tehzeeb dikhai jaati hai, to saheliyon ke chhedne par sharma kar ungliyon par dupatta lapetne ka andaaz bhi dikhta hai. Isi tehzeeb mein Ghar shayari bhi padhein.

बड़ी आरूजु थी महबुब को बेनकाब देखें,
दुपट्टा जो सरका तो जुल्फें दीवार बन गई।

Badee aarooju thee mahabub ko benakaab dekhen,
Dupatta jo saraka to julphen deevaar ban gaee.

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तहजीब देखता हूं, मै अक्सर गरीबो के घर मे,
दुपट्टा फटा होता है, लेकिन सर पर होता है।

Tahajeeb dekhata hoon, mai aksar gareebo ke ghar me,
Dupatta phata hota hai, lekin sar par hota hai.

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मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

Mainne rote hue ponchhe the kisee din aansoo
Muddaton maan ne nahin dhoya dupatta apana

Munawwar Rana

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उँगलियों पे दुपट्टा लपेट कर ‪शरमा‬ जाती है वो.,
जब ‪उसकी‬ सहेलियाँ ‎मेरा नाम लेकर छेड़ती है !!

Ungaliyon pe dupatta lapet kar ‪sharama‬ jaatee hai vo.,
Jab ‪usakee‬ saheliyaan ‎mera naam lekar chhedatee hai !!

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Aansoo Shayari

‎तेरे बदन से छिटककर‬ ‎मेरे चेहरे से लिपटा‬..
‪‎इज़हार ए इश्क़ तेरा‬ ‎ये दुपट्टा करता है...

‎tere badan se chhitakakar‬ ‎mere chehare se lipata‬..
‪‎izahaar e ishq tera‬ ‎ye dupatta karata hai...

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Frequently Asked Questions

दुपट्टा शायरी इन हिंदी में सबसे ज्यादा किस भाव पर लिखी जाती है?
दुपट्टा शायरी इन हिंदी में सबसे ज्यादा शर्म, चाहत और थोड़ी शरारत के भाव पर लिखी जाती है, जिसमें दुपट्टे को छेड़छाड़ और मोहब्बत के इज़हार से जोड़ा जाता है। इस तरह के भावुक और खूबसूरत अंदाज़ के लिए Hindi शायरी का कलेक्शन भी देखा जा सकता है।
सर पे दुपट्टा शायरी में गरीबी और तहज़ीब का क्या रिश्ता दिखाया गया है?
सर पे दुपट्टा शायरी में गरीबी और तहज़ीब का रिश्ता इस तरह दिखाया गया है कि भले ही गरीब के घर में दुपट्टा फटा हुआ हो, फिर भी वो इज़्ज़त और संस्कार के साथ सर पर ही रहता है, जैसे “दुपट्टा फटा होता है, लेकिन सर पर होता है” पंक्ति में कहा गया है। घर-परिवार की इस मिट्टी से जुड़ी तहज़ीब के लिए Ghar शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
मां के दुपट्टे से जुड़ी शायरी इतनी भावुक क्यों लगती है?
मां के दुपट्टे से जुड़ी शायरी इतनी भावुक इसलिए लगती है क्योंकि उसमें मां का बिना शर्त प्यार और त्याग छुपा होता है, जैसे “मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू, मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना” पंक्ति में उन आँसुओं की याद को संजोए रखने की बात कही गई है। आँसुओं से जुड़े ऐसे ही गहरे भावों के लिए Aansoo शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
लड़कियों के लिए दुपट्टा शायरी में शर्म और चाहत का भाव कैसे दिखता है?
लड़कियों के लिए दुपट्टा शायरी में शर्म और चाहत का भाव अक्सर उस पल में दिखता है जब सहेलियां किसी का नाम लेकर छेड़ती हैं और लड़की शर्माकर उंगलियों पर दुपट्टा लपेट लेती है, जैसे “उँगलियों पे दुपट्टा लपेट कर शरमा जाती है वो” पंक्ति में कहा गया है। ऐसे प्यारे और यादगार दिनों के भाव के लिए Din शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
दुपट्टा सरकने वाली शायरी में इश्क़ की झलक कैसे मिलती है?
दुपट्टा सरकने वाली शायरी में इश्क़ की झलक उस लम्हे में मिलती है जब महबूब का चेहरा अचानक बेनकाब हो जाता है और उसकी जुल्फें भी शायर के लिए एक नया जादू बन जाती हैं, जैसे “दुपट्टा जो सरका तो जुल्फें दीवार बन गई” पंक्ति में कहा गया है। इश्क़ के ऐसे ही खूबसूरत लम्हों के लिए Ishq शायरी भी पढ़ी जा सकती है।

Ek sher yahan aansoo poochhne wale dupatte ko yaad karta hai jise maa ne muddaton se khud nahi dhoya, to doosra badan se chhitak kar chehre se lipatte dupatte ko izhaar-e-ishq batata hai. Aage Aansoo aur Din shayari bhi padhein.