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Deepak Shayari

Ek deepak ka noor, andhera aur tanhai dono mita deta hai.

Deepak shayari mein Makar Sankranti ke din ladduon jaisi meethi khushiyan aur ek deepak ke noor se tanha dil ke majboor na hone ki baat milti hai. Isi roshni mein Andhera shayari bhi padhein.

Deepak Shayari - Roshni Aur Bhakti Ke Sher

दीपक में अगर नूर ना होता,
तन्हाँ दिल मजबूर ना होता,
हम भी मकर संक्रांति के दिन लड्डू
लेकर आपके घर आते
अगर आपका घर हमारे घर से दूर ना होता.
हैप्पी मकर संक्रांति

Deepak mein agar noor na hota,
Tanhaan dil majaboor na hota,
Ham bhee makar sankraanti ke din laddoo
Lekar aapake ghar aate
Agar aapaka ghar hamaare ghar se door na hota.
Haippee makar sankraanti

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मेरे अंदर जिन्होंने ज्ञान का दीपक जलाया,
उन गुरूजी को एक बार भी धन्यवाद नहीं कह पाया.

Mere andar jinhonne gyaan ka deepak jalaaya,
Un guroojee ko ek baar bhee dhanyavaad nahin kah paaya.

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हद है कि गैर मुल्क के बल्बों की रौशनी

हद है कि गैर मुल्क के बल्बों की रौशनी
मेरे वतन की मिट्टी के दीपक को खा गयी....

Had hai ki gair mulk ke balbon kee raushanee,
Mere watan kee mittee ke deepak ko kha gayee....

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Frequently Asked Questions

दीपक शायरी इन हिंदी में मकर संक्रांति जैसे मौकों पर क्या भाव होता है?
दीपक शायरी इन हिंदी में मकर संक्रांति जैसे मौकों पर अपनेपन और दूरी का भाव एक साथ आता है, जैसे “अगर आपका घर हमारे घर से दूर ना होता” पंक्ति में त्योहार पर पास न होने की टीस झलकती है। दूरी से जुड़े ऐसे ही एहसासों के लिए Door शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
गुरु के लिए ज्ञान का दीपक जलाने वाली शायरी का क्या मतलब है?
गुरु के लिए ज्ञान का दीपक जलाने वाली शायरी का मतलब है कि गुरु हमारे अंदर समझ और रोशनी भर देते हैं, फिर भी अक्सर हम दिल से उनका धन्यवाद कहना भूल जाते हैं, जैसे “उन गुरूजी को एक बार भी धन्यवाद नहीं कह पाया” पंक्ति में कहा गया है। दिल की इस कृतज्ञता को जताने के लिए Dil शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
विदेशी बल्बों से देसी दीपक की तुलना करने वाली शायरी में क्या संदेश है?
विदेशी बल्बों से देसी दीपक की तुलना करने वाली शायरी में यह संदेश है कि चमक-दमक भरी विदेशी चीज़ों ने अपनी मिट्टी और परंपरा की रोशनी को दबा दिया है, जैसे “गैर मुल्क के बल्बों की रौशनी मेरे वतन की मिट्टी के दीपक को खा गयी” पंक्ति में कहा गया है। इस खोती हुई रोशनी और अंधेरे के भाव के लिए Andhera शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
दीपक नेम शायरी में नाम को दीपक से क्यों जोड़ा जाता है?
दीपक नेम शायरी में नाम को दीपक से इसलिए जोड़ा जाता है क्योंकि जिस तरह दीपक अंधेरे में रोशनी और उम्मीद देता है, उसी तरह यह नाम भी रोशनी, गर्मजोशी और चाह की भावना जगाता है। इस नाम से जुड़ी अपनी चाहतों को शायरी में पिरोने के लिए Chaah शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
दीपक शायरी अंधेरे और दूरी के भाव से कैसे जुड़ी है?
दीपक शायरी अंधेरे और दूरी के भाव से इस तरह जुड़ी है कि दीपक हमेशा उस रोशनी और उम्मीद का प्रतीक बनता है जो दूर रहते हुए भी दिल को जोड़े रखती है, जैसे “दीपक में अगर नूर ना होता, तन्हाँ दिल मजबूर ना होता” पंक्ति में दिखता है। ऐसी ही छोटी लेकिन गहरी बातों के लिए 2 Line शायरी का कलेक्शन भी देखा जा सकता है।

Ek sher yahan gyaan ka deepak jalane wale guruji ko dhanyavaad na keh paane ka malaal jataata hai, to doosra apni mitti ke deepak par ganv-mulk jaisi mitti ke fakhr ki baat karta hai. Aage Dil aur Chaah shayari bhi padhein.