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Bhrashtachar Shayari

Vote khareedne se lekar kursi tak, bhrashtachar ka sach.

Bhrashtachar shayari un vyangatmak lines ka sangrah hai jo neta aur gram pradhan ke chunav jeetne ke baad badalte rang par tanz karti hain, vote bikte hain, vaade tootte hain. Isi mizaaj ke liye Anyay shayari bhi padhein.

Bhrashtachar Shayari - Bhrashtachar Par Vyang Sher

जो बोटी और रोटी के लिए वोट बेच दे,
वो भ्रष्टाचार की बात ना करें.

Jo botee aur rotee ke lie vot bech de,
Vo bhrashtaachaar kee baat na karen.

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जनता चुनती है सबसे योग्य उम्मीदवार,
जीतने के बाद करते है ये बड़ा भ्रष्टाचार.

Janata chunatee hai sabase yogy ummeedavaar,
Jeetane ke baad karate hai ye bada bhrashtaachaar.

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भ्रष्टाचार में इनका भी नाम है,
ये गाँव के पूर्व प्रधान है.

Bhrashtaachaar mein inaka bhee naam hai,
Ye gaanv ke poorv pradhaan hai.

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ग्राम प्रधान चुनाव जीतने के लिए जो पैसा लगाएगा,
वो जीतने के बाद चुनाव में खर्च पैसा भ्रष्टाचार करके कमाएगा.

Graam pradhaan chunaav jeetane ke lie jo paisa lagaega,
Vo jeetane ke baad chunaav mein kharch paisa bhrashtaachaar karake kamaega.

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Anyay Shayari

जाए तो कंहा जाए
किसी का इतिहास भ्रष्टाचार में है नहाए
तो किसी के अच्छे दिन अब तक नहीं आए

Jae to kanha jae
Kisee ka itihaas bhrashtaachaar mein hai nahae
To kisee ke achchhe din ab tak nahin aae

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अब हर घर से एक राम निकलेगा मंगलमय हो दशहरा

अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं,
भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा,
अब हर घर से एक राम निकलेगा.
मंगलमय हो दशहरा

Anyaay ke roop mein ab netaon ka bhrashtaachaar hain,
Raavan ke roop mein netaon ka atyaachaar hain,
Bhrashtaachaar aur atyaachaar mitaane ke lie shankh bajega,
Ab har ghar se ek raam nikalega.
Mangalamay ho dashahara

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अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं

अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं,
भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा,
अब हर घर से एक राम निकलेगा.

Anyaay ke roop mein ab netaon ka bhrashtaachaar hain,
Raavan ke roop mein netaon ka atyaachaar hain,
Bhrashtaachaar aur atyaachaar mitaane ke lie shankh bajega,
Ab har ghar se ek raam nikalega.

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Frequently Asked Questions

भ्रष्टाचार शायरी में मुख्य रूप से किस बात पर तंज कसा जाता है?
यह शायरी वोट के बदले लालच और नेताओं की बेईमानी पर सीधा और तीखा व्यंग्य करती है। एक पंक्ति कहती है, "जो बोटी और रोटी के लिए वोट बेच दे, वो भ्रष्टाचार की बात ना करें।" यह शेर आम जनता को भी आइना दिखाता है, न कि सिर्फ नेताओं को। ऐसे विषयों पर और गहरी शायरी Anyay श्रेणी में भी मिलती है।
क्या भ्रष्टाचार शायरी किसी एक राजनीतिक दल की आलोचना करती है?
नहीं, यह शायरी सामान्य रूप से सत्ता के दुरुपयोग और चुनावी बेईमानी पर बात करती है, बिना किसी खास दल का नाम लिए। यह हर स्तर के नेता और उम्मीदवार पर लागू होने वाली एक व्यापक टिप्पणी है, जैसा Election से जुड़ी शायरी में भी चुनावी व्यवस्था पर आम बात होती है।
गाँव के प्रधान से जुड़े भ्रष्टाचार पर कौन सी पंक्तियाँ मिलती हैं?
एक शेर सीधे गाँव के स्तर की राजनीति पर टिप्पणी करता है, "भ्रष्टाचार में इनका भी नाम है, ये गाँव के पूर्व प्रधान है।" यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार सिर्फ बड़े शहरों या केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि गाँव के छोटे पदों तक भी फैला है, और इसे Mitane जैसी शायरी में मिटाने की चाह भी झलकती है।
चुनाव जीतने के बाद खर्चा वसूलने वाली बात शायरी में कैसे आती है?
यह शायरी बताती है कि चुनाव में लगाया गया पैसा जीतने के बाद भ्रष्टाचार के जरिए वसूला जाता है। पंक्ति है, "ग्राम प्रधान चुनाव जीतने के लिए जो पैसा लगाएगा, वो जीतने के बाद चुनाव में खर्च पैसा भ्रष्टाचार करके कमाएगा।" यह एक कड़वी सच्चाई को सीधी भाषा में बयां करती है।
क्या इस शायरी में जनता की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है?
हाँ, एक शेर जनता की पसंद और नतीजे के बीच के विरोधाभास पर बात करता है, "जनता चुनती है सबसे योग्य उम्मीदवार, जीतने के बाद करते है ये बड़ा भ्रष्टाचार।" यह शायरी उस निराशा को दिखाती है जो चुनाव के बाद अक्सर सामने आती है, ठीक वैसे जैसे Dussehra की शायरी में बुराई पर जीत की उम्मीद जताई जाती है, जो यहाँ अधूरी रह जाती है।

Dussehra ke prasang se juda ek sher bhrashtachar ko Ravan jaisi buraai batakar khatam karne ka sandesh deta hai. Aur dekhein Dussehra aur Election shayari.