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Nyay Shayari

Justice, promised more often than it's given

Several of these nyay shayari lines say the quiet part out loud, that real justice rarely finds the poor, however loudly it's promised. Read the full status-style lines on our Status page.

Nyay Shayari - Justice & Dussehra Lines in Hindi

हकीकत में गरीबो को न्याय मिलता नहीं,
पर यह सच कोई किसी से कहता नहीं.

Hakeekat mein gareebo ko nyaay milata nahin,
Par yah sach koee kisee se kahata nahin.

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यहाँ हर शासक दुर्योधन है
यहाँ न्याय न मिल पायेगा
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो
अब गोविन्द न आयेगा.

Yahaan har shaasak duryodhan hai
Yahaan nyaay na mil paayega
Suno dropadee shastr utha lo
Ab govind na aayega.

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अब हर घर से एक राम निकलेगा मंगलमय हो दशहरा

अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं,
भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा,
अब हर घर से एक राम निकलेगा.
मंगलमय हो दशहरा

Anyaay ke roop mein ab netaon ka bhrashtaachaar hain,
Raavan ke roop mein netaon ka atyaachaar hain,
Bhrashtaachaar aur atyaachaar mitaane ke lie shankh bajega,
Ab har ghar se ek raam nikalega.
Mangalamay ho dashahara

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इतना तो सोच जालिम जौरो-जफा* से पहले
यह रस्म दोस्ती की दुनिया से उठ जायेगी

*जौरो-जफा – अत्याचार, अन्याय, जुल्मो-सितम

Itana to soch jaalim jauro-japha* se pahale
Yah rasm dostee kee duniya se uth jaayegee

*jauro-japha – atyaachaar, anyaay, julmo-sitam

Aziz Lakhnavi

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Aah Shayari

जिसने सिखाया जीवन ज्ञान

साधारण मनुष्य की छवि में जन्मे
कराया सबको पुरुषार्थ का ज्ञान
किया दशानंद के अहम् का विनाश
फैलाया न्याय और धर्म का प्रकाश
सिखाया सेवक का भाव जिसने
उसी ने बताया मित्रता का व्यवहार
ऐसा रोचक था रामायण पुराण
जिसने सिखाया जीवन ज्ञान

Saadhaaran manushy kee chhavi mein janme
Karaaya sabako purushaarth ka gyaan
Kiya dashaanand ke aham ka vinaash
Phailaaya nyaay aur dharm ka prakaash
Sikhaaya sevak ka bhaav jisane
Usee ne bataaya mitrata ka vyavahaar
Aisa rochak tha raamaayan puraan
Jisane sikhaaya jeevan gyaan

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जब रावन को हरा मेरा राम जीता था

अधर्म को हरा के धर्म जीता था,
अन्याय को हरा न्याय जीता था,
हुआ था बुराई का अंत
जब रावन को हरा मेरा राम जीता था.

दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं

Adharm ko hara ke dharm jeeta tha,
Anyaay ko hara nyaay jeeta tha,
Hua tha buraee ka ant
Jab raavan ko hara mera raam jeeta tha.

Dashahare kee haardik shubhakaamanaen

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यही है दशहरे का त्यौहार

अधर्म पर धर्म की जीत
अन्याए पर न्याय की विजय
बुराई पर अच्छाई की जय जय कार
यही है दशहरे का त्यौहार

Adharm par dharm kee jeet
Anyae par nyaay kee vijay
Buraee par achchhaee kee jay jay kaar
Yahee hai dashahare ka tyauhaar

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अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं

अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं,
भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा,
अब हर घर से एक राम निकलेगा.

Anyaay ke roop mein ab netaon ka bhrashtaachaar hain,
Raavan ke roop mein netaon ka atyaachaar hain,
Bhrashtaachaar aur atyaachaar mitaane ke lie shankh bajega,
Ab har ghar se ek raam nikalega.

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अधर्म पर धर्म की सदा जीत हो

अधर्म पर धर्म की सदा जीत हो,
अन्याय पर न्याय को मिले विजय,
ह्रदय से हो श्री राम का जय-जयकार
यही हैं दशहरे का त्योंहार.

Adharm par dharm kee sada jeet ho,
Anyaay par nyaay ko mile vijay,
Hraday se ho shree raam ka jay-jayakaar
Yahee hain dashahare ka tyonhaar.

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Frequently Asked Questions

हक़ीक़त में गरीबों को न्याय न मिलने का सच कोई न कहने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"हकीकत में गरीबो को न्याय मिलता नहीं, पर यह सच कोई किसी से कहता नहीं." — यह शायरी कहती है कि हक़ीक़त में गरीबों को न्याय नहीं मिलता, पर यह सच कोई किसी से नहीं कहता।
हर शासक को दुर्योधन जैसा बताकर द्रोपदी को खुद शस्त्र उठाने को कहने वाली शायरी कौन सी है?
"यहाँ हर शासक दुर्योधन है यहाँ न्याय न मिल पायेगा सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो अब गोविन्द न आयेगा." — यह शायरी पौराणिक प्रतीकों (दुर्योधन, द्रोपदी, गोविन्द) के ज़रिए आज के अन्याय पर एक सामान्य टिप्पणी करती है, किसी खास शासक या दल का नाम नहीं लेती।
जुल्म करने से पहले दोस्ती की रस्म ही दुनिया से उठ जाने की चेतावनी देने वाली शायरी कौन सी है?
"इतना तो सोच जालिम जौरो-जफा* से पहले यह रस्म दोस्ती की दुनिया से उठ जायेगी *जौरो-जफा – अत्याचार, अन्याय, जुल्मो-सितम" — यह शायरी चेतावनी देती है कि जुल्म करने वाले को पहले सोचना चाहिए, वरना दोस्ती की रस्म ही दुनिया से उठ जाएगी।
नेताओं के भ्रष्टाचार को अन्याय और अत्याचार को रावण बताकर हर घर से राम निकलने की बात कहने वाली दशहरा शायरी कौन सी है?
"अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं, रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं, भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा, अब हर घर से एक राम निकलेगा. मंगलमय हो दशहरा" — यह दशहरा शायरी नेताओं के भ्रष्टाचार को अन्याय और अत्याचार को रावण के रूप में बताते हुए हर घर से एक राम निकलने की कामना करती है; यह किसी खास नेता या दल का नाम नहीं लेती।
न्याय से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Status, Aashiqui और Hunar शायरी पढ़ सकते हैं।

Around Dussehra, nyay takes a festive shape too, with Ram's win over Ravan standing in for every fight between right and wrong. For more heartfelt lines in a similar spirit, see our Aah shayari.