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Bebasi Shayari

Bebasi wo dard hai jo aksar chup rehta hai.

Bebasi shayari un lamhon ki baat karti hai jab pinjra khula ho par udaan mumkin na ho, ya jab rona bhi mumkin na ho aur bas gale lag jaana hi raasta bache. Isi ehsaas mein Chaah shayari bhi padhein.

Bebasi Shayari - Majboori Aur Dard Ke Sher

बेबसी की इंतिहा उस परिंदे से पूछिये
जिसका पिंजरा रखा हो खुले आसमान के निचे

Bebasee kee intiha us parinde se poochhiye
Jisaka pinjara rakha ho khule aasamaan ke niche

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बेबस भी हो गर तो बेबसी को दिल में दबा के चल

बेबस भी हो गर तो बेबसी को दिल में दबा के चल ,
साथ चाहिए ज़माने का तो महक,यूँ मुस्कुरा के चल !!

Bebas bhee ho gar to bebasee ko dil mein daba ke chal ,
Saath chaahie zamaane ka to mahak,yoon muskura ke chal !!

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बेबसी थान सी खुलती ही गयी

बेबसी थान सी खुलती ही गयी
सुकून कुछ पल में खर्च हुए सारे

Bebasee thaan see khulatee hee gayee
Sukoon kuchh pal mein kharch hue saare

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बेबसी भी कभी क़ुर्बत का सबब बनती है

बेबसी भी कभी क़ुर्बत का सबब बनती है
रो न पाएँ तो गले यार से लग जाते हैं

Bebasee bhee kabhee qurbat ka sabab banatee hai
Ro na paen to gale yaar se lag jaate hain

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2 Line Shayari

मोहब्बत, इंतजार, बेबसी, तङप...!!!
इतने कपङो मेँ भला ठंड लगती है क्या...!!!

Mohabbat, intajaar, bebasee, tanap...!!!
Itane kapano men bhala thand lagatee hai kya...!!!

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बेबसी की इक हद ये भी है,
ना तुम मेरे हो और ना मैं अपना हूँ..

Bebasee kee ik had ye bhee hai,
Na tum mere ho aur na main apana hoon..

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Frequently Asked Questions

बेबसी शायरी में पिंजरे वाले परिंदे की मिसाल क्या बताती है?
यह पंक्ति बेबसी की सबसे गहरी तस्वीर पेश करती है, जहाँ आज़ादी आँखों के सामने खुले आसमान की तरह दिखती तो है, पर पिंजरे की वजह से हाथ नहीं आती। शेर है, "बेबसी की इंतिहा उस परिंदे से पूछिये जिसका पिंजरा रखा हो खुले आसमान के निचे।" यह Bebasee की उस पीड़ा को दर्शाता है जो पास होकर भी दूर होने से पैदा होती है।
बेबसी को दिल में दबाकर मुस्कुराने की सलाह क्या सिखाती है?
यह शेर सिखाता है कि कभी-कभी अपनी लाचारी को अंदर ही समेट कर, बाहर से मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना ही जमाने के साथ चलने का तरीका है। पंक्ति है, "बेबस भी हो गर तो बेबसी को दिल में दबा के चल, साथ चाहिए ज़माने का तो महक, यूँ मुस्कुरा के चल !!" यह Dil की अंदरूनी ताकत और बाहरी संयम के बीच का संतुलन दिखाता है।
"बेबसी थान सी खुलती गयी" पंक्ति का क्या मतलब है?
यह पंक्ति बेबसी को एक कपड़े के थान की तरह दिखाती है जो धीरे-धीरे खुलता ही चला जाता है, जबकि सुकून बहुत जल्दी खर्च हो जाता है। शेर है, "बेबसी थान सी खुलती ही गयी सुकून कुछ पल में खर्च हुए सारे।" यह उस असंतुलन को दिखाता है जहाँ तकलीफ लंबी खिंचती है और राहत बहुत छोटी होती है।
बेबसी कभी नजदीकियों की वजह कैसे बन जाती है?
यह शेर एक अलग नजरिया दिखाता है, जहाँ बेबसी और मजबूरी भी कभी-कभी दो लोगों को करीब ला देती है। पंक्ति है, "बेबसी भी कभी क़ुर्बत का सबब बनती है रो न पाएँ तो गले यार से लग जाते हैं।" यह दिखाता है कि जब शब्द और आँसू दोनों साथ छोड़ दें, तो सिर्फ किसी अपने का गले लगना ही सहारा बनता है।
क्या बेबसी शायरी में हमेशा सिर्फ निराशा ही झलकती है?
नहीं, हालांकि ज्यादातर शेर बेबसी के दर्द और उसकी Had को दिखाते हैं, फिर भी कुछ पंक्तियां यह भी बताती हैं कि इस लाचारी में भी मुस्कुराने और अपनों के करीब आने की गुंजाइश बची रहती है। यही इस विषय को सिर्फ उदासी नहीं, बल्कि जिंदगी की एक सच्ची और गहरी सच्चाई बनाता है।

Kuch sher yahan adhoore rishton ki bebasi ki baat bhi karte hain, na poora apna hona na poora paraaya. Aage Bebasee aur Bebus shayari bhi padhein.