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Ankahi Shayari

Jo kaha nahi gaya, wahi sabse gehra hai

Kabhi kisi ka haath thaam lena hi bata deta hai ki baat kahe bina bhi samajhi ja sakti hai - yahi is topic ki asli rooh hai. Aisi hi khamosh baaton ke liye Aankh bhi zaroor padhein.

Ankahi Shayari - Bin Kahe Dil Ki Baat

जो पर-पीड़ा मन में धारे, वो नयन नीर हो जाएगा
जो नैनों की भाषा समझा, अनकही पीर हो जाएगा
जो जीवन के व्यामोह मोह को तजकर दृग गंगाजल से
तन-मन को तीर्थ बना लेगा, वो महावीर हो जाएगा
महावीर जयंती की शुभकामनाएं

Jo par-peeda man mein dhaare, vo nayan neer ho jaega
Jo nainon kee bhaasha samajha, anakahee peer ho jaega
Jo jeevan ke vyaamoh moh ko tajakar drg gangaajal se
Tan-man ko teerth bana lega, vo mahaaveer ho jaega
Mahaaveer jayantee kee shubhakaamanaen

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हाथ पर हाथ रखा उसने तो मालुम हुआ,
अनकही बात को किस तरह सुना जाता है।

Haath par haath rakha usane to maalum hua,
Anakahee baat ko kis tarah suna jaata hai.

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जता दो अहसास जो अभी बाकि है...
कहीं कल को अनकही यादें बनकर रह न जाये...!!

Jata do ahasaas jo abhee baaki hai...
Kaheen kal ko anakahee yaaden banakar rah na jaaye...!!

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फिर अनकही रह जाएँगी सारी शिकायतें...
फिर पलकें झुक गई हैं तेरे एहतराम में...!!

Phir anakahee rah jaengee saaree shikaayaten...
Phir palaken jhuk gaee hain tere ehataraam mein...!!

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2 Line Shayari

रूह के रिश्तों की यही खूबी है ...
महसूस हो ही जाती है कुछ बातें अनकही !!

Rooh ke rishton kee yahee khoobee hai ...
Mahasoos ho hee jaatee hai kuchh baaten anakahee !!

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जता दो अहसास जो अभी हैं

जता दो अहसास जो अभी हैं,
कल को अनकही यादें बनकर रह जाएंगे...!

Jata do ahasaas jo abhee hain,
Kal ko anakahee yaaden banakar rah jaenge...!

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रहने दे कुछ बातें यूँ ही अनकही सी

रहने दे कुछ बातें यूँ ही अनकही सी ...!
कुछ जवाब तेरी आँखों में देखे हैं अटके हुए.

Rahane de kuchh baaten yoon hee anakahee see ...!
Kuchh javaab teree aankhon mein dekhe hain atake hue.

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हाथ पर हाथ रखा उसने ...तो मालूम हुआ...
अनकही बात को किस तरह सुना जाता है...!!

Haath par haath rakha usane ...to maaloom hua...
Anakahee baat ko kis tarah suna jaata hai...!!

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Frequently Asked Questions

महावीर जयंती की शायरी में "अनकही पीर" का क्या मतलब है?
"जो पर-पीड़ा मन में धारे, वो नयन नीर हो जाएगा, जो नैनों की भाषा समझा, अनकही पीर हो जाएगा" पंक्ति बताती है कि दूसरों का दर्द समझने वाला इंसान खुद भी उस अनकही पीड़ा को महसूस करने लगता है — यह करुणा और संवेदनशीलता का गहरा भाव है, जो महावीर जयंती के अवसर पर अहिंसा और सहानुभूति की सीख देता है।
हाथ पर हाथ रखने से अनकही बात सुनने का भाव यह शायरी कैसे दिखाती है?
"Haath पर हाथ रखा उसने तो मालुम हुआ, अनकही बात को किस तरह सुना जाता है" पंक्ति दिखाती है कि कभी-कभी शब्दों से ज़्यादा एक स्पर्श ही दिल की बात कह देता है — खामोशी में भी गहरा संवाद छुपा होता है।
कल को अनकही यादें बनने से बचाने की सलाह इस शायरी में क्यों दी गई है?
"जता दो अहसास जो अभी बाकि है... कहीं Kal को अनकही यादें बनकर रह न जाये" पंक्ति आज ही अपने एहसास ज़ाहिर कर देने की सीख देती है, क्योंकि कल अगर मौका न मिला तो वो बात हमेशा के लिए अनकही रह जाएगी।
पलकें झुकने पर शिकायतें अनकही रह जाने का भाव क्या दर्शाता है?
"फिर अनकही रह जाएँगी सारी शिकायतें... फिर पलकें झुक गई हैं तेरे एहतराम में" पंक्ति दिखाती है कि किसी के सम्मान और अदब में कई बार शिकायतें भी ज़ुबान तक नहीं आ पातीं, आँखें झुककर ही सब कुछ कह देती हैं।
अनकही शायरी में खामोश एहसासों को शब्दों में ढालने का हुनर कैसे झलकता है?
पर-पीड़ा की करुणा से लेकर स्पर्श की भाषा और झुकी पलकों की शिकायतों तक — यह Hindi Baatein का वो हुनर है जो बिना कहे भी बहुत कुछ कह जाता है।

Kal kahin yeh ankahi baatein sirf yaadein bankar reh na jaayein, isi darr ke saath likhi gayi hain yeh lines. Judi hui shayari Baatein aur Haath mein bhi milegi.