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Vyavahar Shayari

Achche vyavahar aur rishton ki asli keemat wali Hindi lines

In sheron mein vyavahar ko rishton ki neev maana gaya hai — kabhi yeh meethi baaton mein chhupa hota hai, kabhi khaali len-den ban jaata hai. Gehri baat ke liye Gyaan shayari bhi is soch ko aage badhati hai.

Vyavahar Shayari – Achche Vyavahar Par Hindi Sher

मधुर व्यवहार को भी,
कुछ लड़के प्रेम समझ लेते हैं !!

Madhur vyavahaar ko bhee,
Kuchh ladake prem samajh lete hain !!

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मतलब से है मित्रता, मतलब से है प्यार,
सभी दोगले कर रहे, मतलब का व्यवहार !!

Matalab se hai mitrata, matalab se hai pyaar,
Sabhee dogale kar rahe, matalab ka vyavahaar !!

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वृक्षों पर सजती नये पत्तो की बहार

वृक्षों पर सजती नये पत्तो की बहार
हरियाली से महकता प्रकृति का व्यवहार !!
ऐसा सजता हैं गुड़ी का त्यौहार
मौसम ही कर देता नववर्ष का सत्कार !!

Vrkshon par sajatee naye patto kee bahaar
Hariyaalee se mahakata prakrti ka vyavahaar !!
Aisa sajata hain gudee ka tyauhaar
Mausam hee kar deta navavarsh ka satkaar !!

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प्रेम तो प्रकृति है ये कोई व्यवहार नही की...
तुम करो तो ही मैं करू...!!

Prem to prakrti hai ye koee vyavahaar nahee kee...
Tum karo to hee main karoo...!!

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Desh Shayari

सुनो प्रेम कोई व्यवहार थोड़े ही है

सुनो, प्रेम कोई व्यवहार, थोड़े ही है...
कि तूम करो, तो ही मैं करुँ...!!

Suno, prem koee vyavahaar, thode hee hai...
Ki toom karo, to hee main karun...!!

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लोग कहते है कि त्यौहार फीके हो गए,
सच तो ये है कि व्यवहार फीके हो गए !!

!! देव उठनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाये !!

Log kahate hai ki tyauhaar pheeke ho gae,
Sach to ye hai ki vyavahaar pheeke ho gae !!

!! dev uthanee ekaadashee kee haardik shubhakaamanaaye !!

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जिसने सिखाया जीवन ज्ञान

साधारण मनुष्य की छवि में जन्मे
कराया सबको पुरुषार्थ का ज्ञान
किया दशानंद के अहम् का विनाश
फैलाया न्याय और धर्म का प्रकाश
सिखाया सेवक का भाव जिसने
उसी ने बताया मित्रता का व्यवहार
ऐसा रोचक था रामायण पुराण
जिसने सिखाया जीवन ज्ञान

Saadhaaran manushy kee chhavi mein janme
Karaaya sabako purushaarth ka gyaan
Kiya dashaanand ke aham ka vinaash
Phailaaya nyaay aur dharm ka prakaash
Sikhaaya sevak ka bhaav jisane
Usee ne bataaya mitrata ka vyavahaar
Aisa rochak tha raamaayan puraan
Jisane sikhaaya jeevan gyaan

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बुराई का रूप अब भ्रष्ट्राचार है

बुराई का रूप अब भ्रष्ट्राचार है,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं !!
देश रूपी इस लंका में कौन राम बनेगा,
यहाँ तो अब बस मिलावटी व्यवहार हैं !!

Buraee ka roop ab bhrashtraachaar hai,
Raavan ke roop mein netaon ka atyaachaar hain !!
Desh roopee is lanka mein kaun raam banega,
Yahaan to ab bas milaavatee vyavahaar hain !!

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अंदाज़ कुछ अलग ही हे मेरे सोचने का....
सब को पैसा कमाने का शौख हे, मुझे व्यवहार बनाने का ....

Andaaz kuchh alag hee he mere sochane ka....
Sab ko paisa kamaane ka shaukh he, mujhe vyavahaar banaane ka ....

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Dil Shayari

अच्छे व्यवहार का कोई आर्थिक मूल्य भले ही ना हो...
पर करोड़ों दिलो को खरीदने की शक्ति रखता है...!!

Achchhe vyavahaar ka koee aarthik mooly bhale hee na ho...
Par karodon dilo ko khareedane kee shakti rakhata hai...!!

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Frequently Asked Questions

'मधुर व्यवहार को प्रेम समझ लेना' वाली शायरी में क्या हल्का व्यंग्य है?
'मधुर व्यवहार को भी, कुछ लड़के प्रेम समझ लेते हैं' पंक्ति उस आम गलतफहमी पर हल्का सा मजाकिया तंज करती है जहाँ किसी की सामान्य विनम्रता को प्रेम का इशारा समझ लिया जाता है। यह रोजमर्रा के रिश्तों में होने वाली छोटी लेकिन दिलचस्प उलझन को बयां करती है।
मतलब के व्यवहार वाली शायरी में समाज पर क्या टिप्पणी है?
'मतलब से है मित्रता, मतलब से है प्यार, सभी दोगले कर रहे, मतलब का व्यवहार' पंक्ति आज के स्वार्थी रिश्तों पर तीखा कटाक्ष करती है, जहाँ दोस्ती और प्यार भी अक्सर फायदे से जुड़े नजर आते हैं। यह Insaan शायरी जैसी गहरी सामाजिक सोच को दर्शाती है।
गुड़ी पड़वा पर प्रकृति के व्यवहार वाली शायरी का भाव क्या है?
'वृक्षों पर सजती नये पत्तो की बहार हरियाली से महकता प्रकृति का व्यवहार, ऐसा सजता हैं गुड़ी का त्यौहार' पंक्ति नए साल के स्वागत में प्रकृति के खिलने और हरियाली के व्यवहार को त्योहार की खुशी से जोड़ती है। यह मौसम के बदलाव को नववर्ष के उत्सव जैसा सत्कार बताती है।
'प्रेम कोई व्यवहार नहीं, प्रकृति है' वाली शायरी क्या सिखाती है?
'प्रेम तो प्रकृति है ये कोई व्यवहार नही की... तुम करो तो ही मैं करू' पंक्ति बताती है कि सच्चा प्यार शर्तों या बदले की उम्मीद पर टिका व्यवहार नहीं, बल्कि स्वाभाविक भावना है। यह Dil से निकले निस्वार्थ प्रेम की गहरी सोच को दर्शाती है।
व्यवहार पर लिखी शायरियाँ किन भावों को समेटती हैं?
इस कलेक्शन में रिश्तों की गलतफहमी, समाज का स्वार्थ, प्रकृति का उत्सव और निस्वार्थ प्रेम तक कई भाव शामिल हैं, जो Anmol Vachan जैसी गहरी सीख से भी जुड़ते हैं। हर पंक्ति व्यवहार शब्द को इंसानी रिश्तों के अलग नजरिए से दिखाती है।

Ek sher yaad dilata hai ki achche vyavahar ka koi aarthik mol nahi hota, phir bhi woh karoron dil jeet sakta hai. Dil se juda vyavahar ho ya Desh ke prati apna farz, sab yahan milega.