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Qayamat Shayari

Jab husn khud qayamat ban jaaye

Classic Urdu shayari mein husn ko qayamat kehna sadiyon purana andaaz raha hai, jahan kisi ki khoobsurati hi sabse badi aafat ban jaati hai. Yehi jazbaat Ishq mein bhi kholkar dikhaye gaye hain.

Qayamat Shayari - Husn Aur Ishq Ki Inteha

बला है क़हर है आफ़त है फ़ित्ना है क़यामत है,
हसीनों की जवानी को जवानी कौन कहता है...!!

अर्श मलसियानी।।

Bala hai qahar hai aafat hai fitna hai qayaamat hai,
haseenon kee javaanee ko javaanee kaun kahata hai...!!

Arsh malasiyaanee..

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हुस्न आफ़त नहीं तो फिर क्या है,
तू क़यामत नहीं तो फिर क्या है?

!! जलील मानिकपूरी !!

Husn aafat nahin to phir kya hai,
Too qayaamat nahin to phir kya hai?

!! jaleel maanikapooree !!

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तन्हा शाम और कपकपाती सुबह...!
इश्क़ के मारो पे क़यामत है ये जनवरी...!!

Tanha shaam aur kapkapati subah,
Ishq ke maaro pe kayamat hai ye January !!

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तुम नफरतों की सोच क़यामत तक ज़ारी रखो...
मैं मोहब्बत से इस्तीफ़ा, मरते दम तक नहीं दूंगी...!!

Tum napharaton kee soch qayaamat tak zaaree rakho...
Main mohabbat se isteefa, marate dam tak nahin doongee...!!

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Ham Shayari

यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे

Yaaro kuchh to zikr karo tum us kee qayaamat baanhon ka
Vo jo simatate honge un mein vo to mar jaate honge

Jaun Elia

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क़यामत का तो सुना था के कोई किसी का ना होगा...
मगर अब तो दुनिया में भी ये रिवाज़ आम हो गया है...!!

Qayaamat ka to suna tha ke koee kisee ka na hoga...
Magar ab to duniya mein bhee ye rivaaz aam ho gaya hai...!!

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क़यामत है तेरा यूँ बन सँवर के आना

क़यामत है तेरा यूँ बन सँवर के आना,
हमारी छोड़ो आईने पे क्या गुज़रती होगी !!

Qayaamat hai tera yoon ban sanvar ke aana,
Hamaaree chhodo aaeene pe kya guzaratee hogee !!

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Frequently Asked Questions

क़यामत शायरी में यह शब्द किस भाव के लिए इस्तेमाल होता है?
क़यामत शायरी में यह शब्द किसी की हद से ज्यादा असरदार खूबसूरती और मोहब्बत की शिद्दत को बयां करने के लिए इस्तेमाल होता है, मानो वह हुस्न या जज़्बात इतने तूफानी हों कि दुनिया थम सी जाए।
हुस्न को क़यामत क्यों कहा जाता है?
अर्श मलसियानी की मशहूर पंक्ति 'बला है क़हर है आफ़त है फ़ित्ना है क़यामत है, हसीनों की जवानी को जवानी कौन कहता है' और जलील मानिकपूरी का शेर 'हुस्न आफ़त नहीं तो फिर क्या है, तू क़यामत नहीं तो फिर क्या है' दोनों ही किसी की खूबसूरत जवानी को इतना असरदार बताते हैं कि उसे क़यामत जैसा तूफानी कह दिया जाता है।
मोहब्बत में क़यामत तक साथ निभाने की बात करने वाली शायरी क्या कहती है?
'तुम नफरतों की सोच क़यामत तक ज़ारी रखो... मैं मोहब्बत से इस्तीफ़ा, मरते दम तक नहीं दूंगी' जैसी शायरी बताती है कि सामने वाला चाहे कितनी भी नफरत क्यों ना पाले, सच्चा इश्क़ मरते दम तक नहीं छूटता।
जनवरी को क़यामत क्यों कहा गया है इस शायरी में?
'तन्हा शाम और कपकपाती सुबह... इश्क़ के मारो पे क़यामत है ये जनवरी' पंक्ति में सर्दी की तन्हा रातों को इश्क में बिछड़े दिलों के लिए क़यामत जैसा मुश्किल बताया गया है, जो जनवरी के मौसम से गहरा जुड़ा है।
क़यामत शायरी हिंदी शायरी की किस परंपरा से जुड़ी है?
क़यामत जैसे उर्दू-मिश्रित शब्दों का इस्तेमाल क्लासिकल हिंदी शायरी की उस परंपरा को दिखाता है, जहां हुस्न और इश्क़ की शिद्दत को बयान करने के लिए तूफानी, बड़े-बड़े लफ़्ज़ों का सहारा लिया जाता है।

Kabhi January ki sardi bhi ishq mein doobe logon ke liye qayamat ban jaati hai, aur kabhi duniya ka badalta rawaiya khud ek qayamat lagne lagta hai. Judi hui shayari January aur Hindi mein bhi padhein.