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Naav Shayari

Kaagaz ki naav mein chhupa hai poora bachpan.

Naav shayari yahan un pareshaniyon ki baat karti hai jinhe kaagaz ki ek naav jaisa halka mehsoos kiya jaata hai, pani mein behte hue bhi. Isi bachpan ke ehsaas mein Aaj shayari bhi padhein.

मै क्या बताऊं कैसी परेशानियों में हूं,
काग़ज़ की एक नाव हूं और पानियों में हूं.!

Mai kya bataoon kaisee pareshaaniyon mein hoon,
Kaagaz kee ek naav hoon aur paaniyon mein hoon.!

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दिल्ली के सर्द मौसम में भी यहाँ गर्मी जैसा हाल है,
मुझे लगता हैं फिर किसी चुनाव का बवाल है.

Dilhi ke sard mausam mein bhee yahaan garmi jaisa haal hai,
Mujhe lagata hain phir kisee chunaav ka bavaal hai.

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खुद की फ़िक्र अक्सर तनाव देती है,
दूसरो की फ़िक्र में कुछ करके देखो सकून मिलेगा...

Khud kee fikr aksar tanaav detee hai,
Doosaro kee fikr mein kuchh karake dekho sakoon milega...

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गरीब की थाली में पुलाव आ गया,
लगता है शहर में चुनाव आ गया !!

Gareeb kee thaalee mein pulaav aa gaya,
Lagata hai shahar mein chunaav aa gaya !!

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2 Line Shayari

लोग दीवाने हैं बनावट के
हम अपनी सादगी ले के कहां जाएँ...

Log deevaane hain banaavat ke
Ham apanee saadagee le ke kahaan jaen..

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उदास रहता है मोहल्ले मै बारिश का पानी आजकल,
सुना है कागज़ की नाव बनानेवाले बड़े हो गए है

Udaas rahata hai mohalle mai baarish ka paanee aajakal,
Suna hai kaagaz kee naav banaanevaale bade ho gae hai

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Frequently Asked Questions

'नाव' शायरी में क्या यह विषय सचमुच नाव (बोट) के बारे में है?
पूरी तरह नहीं — इस टॉपिक पर सिर्फ एक शायरी में नाव का सीधा ज़िक्र है: "मै क्या बताऊं कैसी परेशानियों में हूं, काग़ज़ की एक नाव हूं और पानियों में हूं" — यहाँ ज़िंदगी की मुश्किलों में बहते जाने को कागज़ की नाव से जोड़ा गया है। बाकी शायरियाँ "चुनाव," "तनाव," "पुलाव" जैसे नाव से मिलते-जुलते तुकांत वाले शब्दों पर आधारित हैं, नाव के विषय पर नहीं।
कागज़ की नाव वाली शायरी किस भावना को बयान करती है?
यह शायरी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव में असहाय महसूस करने की भावना दिखाती है — खुद को "काग़ज़ की एक नाव" बताकर कवि यह कहना चाहता है कि परेशानियों के पानी में वह बस बहता जा रहा है, बिना किसी नियंत्रण के।
इस संग्रह की चुनाव वाली शायरियों का मिज़ाज़ क्या है?
दो शायरियाँ हल्के व्यंग्य के अंदाज़ में चुनावी माहौल पर टिप्पणी करती हैं — "दिल्ली के सर्द मौसम में भी यहाँ गर्मी जैसा हाल है, मुझे लगता हैं फिर किसी चुनाव का बवाल है" और "गरीब की थाली में पुलाव आ गया, लगता है शहर में चुनाव आ गया !!" — दोनों ही आम तौर पर चुनावों के दौरान माहौल गर्म होने की बात करती हैं, बिना किसी खास पार्टी का नाम लिए। यह सामान्य टिप्पणी Chunav शायरी के मूल विषय से मेल खाती है।
दूसरों की फ़िक्र वाली शायरी नाव के पेज पर क्यों शामिल है?
"खुद की फ़िक्र अक्सर तनाव देती है, दूसरो की फ़िक्र में कुछ करके देखो सकून मिलेगा" पंक्तियाँ भी "तनाव" शब्द के तुकांत की वजह से इस संग्रह में शामिल हैं। इसका संदेश सीधा है — अपनी चिंताओं में उलझने की बजाय दूसरों की मदद करने से असली सुकून मिलता है, जो 2 Line जैसे संक्षिप्त अंदाज़ में असरदार ढंग से कहा गया है।
इस 'नाव' टॉपिक पर शायरियाँ चुनने का आधार क्या दिखता है?
इस संग्रह की शायरियाँ बताती हैं कि यह टॉपिक नाव के शाब्दिक अर्थ से ज़्यादा उससे मिलते-जुलते तुकांत वाले शब्दों — चुनाव, तनाव, पुलाव — पर आधारित शायरियों को जोड़ता है, सिर्फ एक शायरी वाकई नाव की मिसाल इस्तेमाल करती है। यह विविधता इसे एक दिलचस्प, हल्के-फुल्के मिज़ाज़ का संग्रह बनाती है।

Ek sher yahan yaad dilata hai ki jo baarish mein kaagaz ki naav banate the, woh ab bade ho chuke hain. Aage Ashirwad aur 2 Line shayari bhi padhein.