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Khidki Shayari

Har khidki ke peeche ek intezaar hai

Yeh khidki shayari in Hindi kisi ke chhup kar taakne, raaton ko chaand ke sang khidki par aa baithne aur kisi apne ke aane ki umeed jaisi baaton se bhari hai. Chaandni raaton ka yehi mizaaj Chand mein bhi dikhta hai.

Khidki Shayari - Intezaar Aur Yaadon Ke Sher

खिड़की से झांकता हूँ मै, सबसे नज़र बचा कर
बेचैन हो रहा हूँ, क्यों घर की छत पे आ कर
क्या ढूँढता हूँ, जाने क्या चीज खो गई है,
इन्सान हूँ, शायद मोहब्बत हमको भी हो गई।

Khidki Se Jhankta Hu Main, Sabse Najar Bacha Kar,
Bechain Ho Raha Hu, Kyu Ghar Ki Chhat Pe Aakar,
Kya Dhoondhta Hu, Jaane Kya Cheej Kho Gayi Hai,
Insaan Hu, Shayad Mohabbat Mujhko Ho Gayi Hai.

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पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था
महके हुए दिन-रात थे मेरे और दिसम्बर था !!

चाँदनी-रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी
उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था !!

Pichhale baras tum saath the mere aur December tha
Mahake hue din-raat the mere aur December tha !!

Chaandanee-raat thee sard hava se khidakee bajatee thee
Un haathon mein haath the mere aur December tha !!

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मेरा नाम बोल के सोया करो

मेरा नाम बोल के सोया करो,
खिड़की खोल तकिया मोड़ के सोया करो,
हम भी आएगे तुम्हारे ख़यालो मे,
इसलिए थोड़ी जगह छोड़ के सोया करो!!

Mera naam bol ke soya karo,
Khidakee khol takiya mod ke soya karo,
Ham bhee aaege tumhaare khayaalo me,
Isalie thodee jagah chhod ke soya karo!!

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बड़े अरमान से बनवाया है

बड़े अरमान से बनवाया है;
इसे रोशनी से सजाया है;
बहुत दूर से मंगवाया है;
ज़रा खिड़की खोल के देखो
आपको गुड मोर्निंग कहने सूरज आया है।

Bade aramaan se banavaaya hai;
Ise roshanee se sajaaya hai;
Bahut door se mangavaaya hai;
Zara khidakee khol ke dekho
Aapako gud morning kahane sooraj aaya hai.

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2 Line Shayari

तेरे आने की उम्मीद और भी तड़फाती है

तेरे आने की उम्मीद और भी तड़फाती है,
मेरी खिड़की पे जब शाम उतर आती है...!

Tere aane kee ummeed aur bhee tadaphaatee hai,
Meree khidakee pe jab shaam utar aatee hai...!

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जब निकले मेरा जनाज़ा, तो खिड़की से झांक लेना;
फूल तो बहुत महंगा पड़ेगा, पत्थर तो मार देना!

Jab nikale mera janaaza, to khidakee se jhaank lena;
Phool to bahut mahanga padega, patthar to maar dena!

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बच्चों ने कहा सुनाओ हमे परिओं की कहानी....!!
हमारी नजर तुम्हारी खिड़की पर अटक गई....!!

Bachchon ne kaha sunao hame parion kee kahaanee....!!
Hamaaree najar tumhaaree khidakee par atak gaee....!!

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कुछ ऐसी एहतियात से निकला है चाँद फिर

कुछ ऐसी एहतियात से निकला है चाँद फिर...
जैसे अँधेरी रात में खिड़की पे तुम हो आ गये...

Kuchh aisee ehatiyaat se nikala hai chaand phir...
Jaise andheree raat mein khidakee pe tum ho aa gaye...

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Frequently Asked Questions

खिड़की क्वोट्स इन हिंदी में छुपकर मोहब्बत का एहसास कैसे दिखाया गया है?
खिड़की शायरी में अक्सर चुपके से किसी को देखने और अंदर ही अंदर मोहब्बत के एहसास को महसूस करने का भाव दिखाया जाता है, जैसे "खिड़की से झांकता हूँ मै, सबसे नज़र बचा कर, बेचैन हो रहा हूँ, क्यों घर की छत पे आ कर, क्या ढूँढता हूँ, जाने क्या चीज खो गई है, इन्सान हूँ, शायद मोहब्बत हमको भी हो गई" पंक्ति में झलकता है। ऐसी बेचैन करने वाली छोटी 2 लाइन शायरी भी इसी अंदाज में मिलती है।
दिसंबर और खिड़की को जोड़कर कौन सी यादगार शायरी है?
"चाँदनी-रात थी सर्द हवा से खिड़की बजती थी, उन हाथों में हाथ थे मेरे और दिसम्बर था" पंक्ति में ठंडी दिसंबर की रातों में खिड़की के बजने की आवाज को साथ बिताए हुए पलों की याद से जोड़ा गया है। सर्दी के इस मौसम से जुड़ी दिसंबर शायरी भी इस माहौल को आगे बढ़ाती है।
खिड़की खोलकर सोने की बात कहने वाली शायरी में क्या भाव है?
"मेरा नाम बोल के सोया करो, खिड़की खोल तकिया मोड़ के सोया करो, हम भी आएगे तुम्हारे ख़यालो मे, इसलिए थोड़ी जगह छोड़ के सोया करो" पंक्ति में दूर रहकर भी सपनों में साथ होने की चाहत जताई गई है। दूरी में भी बने इस जुड़ाव से जुड़ी दूर शायरी भी इसी एहसास को दिखाती है।
khidki shayari in hindi में सूरज और गुड मॉर्निंग का जिक्र कैसे किया गया है?
"ज़रा खिड़की खोल के देखो आपको गुड मोर्निंग कहने सूरज आया है" पंक्ति में सुबह की पहली रोशनी को खिड़की खोलकर महसूस करने की खूबसूरत कल्पना की गई है। ऐसी सुबह की ताजगी से भरी गुड मॉर्निंग शायरी भी इस भाव से मिलती है।
khidki par shayari में चांद और रात का जिक्र क्यों बार-बार आता है?
खिड़की से दिखने वाला चांद और रात का सुकून इस शायरी में अक्सर अकेलेपन या यादों के साथ घुल-मिल जाता है, जैसे चांदनी रात वाली पंक्ति में झलकता है। चांद से जुड़ी ऐसी चांद शायरी और दिन भर के एहसासों के लिए दिन शायरी भी पढ़ी जा सकती है।

December ki thandi hawa se khidki ka bajna ho ya subah suraj ki roshni ke liye khidki khol dena, khidki par shayari aksar chhoti-chhoti yaadon ko sameta leti hai. Aise hi din-raat ke rang December aur Din mein milenge.