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Kaante Shayari

Kaante chun kar bhi kisi ka raasta phoolon sa bana diya jaata hai.

Kaante shayari mein sach ki raah par chalna mushkil zaroor hai magar kaanton se bhara raasta bhi kabool hai jab baat kisi apne ki ho. Isi jazbe mein Kabool shayari bhi padhein.

Kaante Shayari - Sach Aur Dosti Ke Sher

इतना भी मुश्किल नहीं सच के रास्ते पर चलना;
कांटे भले कितने भी हो, भीड़ बहुत कम होती है !!

Itna Bhi Mushkil Nahi Sach Ke Raaste Par Chalna;
Kaante Bhale Kitne Bhi Ho, Bheed Bahut Kam Hoti Hai !!

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अपनी जिंदगी के अलग असूल हैं

अपनी जिंदगी के अलग असूल हैं,
यार की खातिर तो कांटे भी कबूल हैं,
हंस कर चल दूं कांच के टुकड़ों पर भी,
अगर यार कहे, यह मेरे बिछाए हुए फूल हैं.

Apanee jindagee ke alag asool hain,
Yaar kee khaatir to kaante bhee kabool hain,
Hans kar chal doon kaanch ke tukadon par bhee,
Agar yaar kahe, yah mere bichhae hue phool hain.

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फूलों को मैं बिछाऊं कहां है मेरी बिसात

फूलों को मैं बिछाऊं, कहां है मेरी बिसात,
कांटे उठा लिए हैं मगर मैने तेरी राह के...!

Phoolon ko main bichhaoon, kahaan hai meree bisaat,
Kaante utha lie hain magar maine teree raah ke...!

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सब फूल लेकर गए...मैं कांटे ही उठा लाया....
पड़े रहते तो किसी क़े पाँव मे जख्म दे जाते.......!!

Sab phool lekar gae...main kaante hee utha laaya....
Pade rahate to kisee qe paanv me jakhm de jaate.......!!

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Frequently Asked Questions

सच के रास्ते पर चलना मुश्किल न होने और कांटों भरी राह पर भीड़ कम होने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"इतना भी मुश्किल नहीं सच के रास्ते पर चलना; कांटे भले कितने भी हो, भीड़ बहुत कम होती है !!" — यह शायरी कहती है कि सच के रास्ते पर चलना उतना भी मुश्किल नहीं, बस उस राह पर कांटे भले कितने भी हों, भीड़ बहुत कम होती है।
यार की खातिर कांटे और कांच के टुकड़े भी कबूल होने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"अपनी जिंदगी के अलग असूल हैं, यार की खातिर तो कांटे भी कबूल हैं, हंस कर चल दूं कांच के टुकड़ों पर भी, अगर यार कहे, यह मेरे बिछाए हुए फूल हैं." — यह शायरी दोस्ती के प्रति समर्पण दिखाते हुए कहती है कि यार की खातिर कांटे भी कबूल हैं, और यार कहे तो कांच के टुकड़ों पर भी हंसकर चला जा सकता है।
फूल बिछाने की बिसात न होने पर तेरी राह के कांटे उठा लेने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"फूलों को मैं बिछाऊं, कहां है मेरी बिसात, कांटे उठा लिए हैं मगर मैने तेरी राह के...!" — यह शायरी कहती है कि फूल बिछाने की मेरी इतनी बिसात कहाँ, इसलिए मैंने तेरी राह के कांटे ही उठा लिए हैं।
सब के फूल ले जाने पर खुद कांटे उठा लाने और किसी के पांव में जख्म से बचाने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"सब फूल लेकर गए...मैं कांटे ही उठा लाया.... पड़े रहते तो किसी क़े पाँव मे जख्म दे जाते.......!!" — यह शायरी कहती है कि सब फूल लेकर चले गए, मैं कांटे ही उठा लाया, क्योंकि पड़े रहते तो किसी के पांव में जख्म दे जाते।
Kaante से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Hindi, Kaanch, Kabool और Mushkil शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan phool bichhaane ki bisaat na hone par bhi tumhari raah ke kaante khud uthaane ki baat karta hai, to doosra sabke phool le jaane ke baad khud kaante hi utha laane ko apna farz maanta hai. Aage Hindi aur 2 Line shayari bhi padhein.