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Janaze Shayari

Jeete ji kadar karna hi asli shraddhanjali hai.

Janaze shayari yahan seedhi si baat kehti hai ki insaanon ki kadar jeete ji honi chahiye, kyunki kaandhe kiraye par nahi milte. Isi bhaav mein Insaan shayari bhi padhein.

Janaze Shayari - Zindagi Aur Maut Ke Sher

गाना भी होगा, बजाना भी होगा, ना कोई बहाना होगा,
23 मई को कांग्रेस के जनाजे में सबको जाना होगा..!!
बोलो राम नाम सत्य हैं!

Gaana bhee hoga, bajaana bhee hoga, na koee bahaana hoga,
23 maee ko kaangres ke janaaje mein sabako jaana hoga..!!
Bolo raam naam saty hain!

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मुझे गुमनाम आशिक कहने वालो ये मंजर भी देख लो
पूरा शहर आया है मेरे जनाजे में !!

Mujhe gumanaam aashik kahane vaalo ye manjar bhee dekh lo
Poora shahar aaya hai mere janaaje mein !!

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थोडी ही सही... पर कद्र तो इंसानों की कर ले ,
जनाजे में कांधे किराये पर नहीं मिला करते....

Thodee hee sahee... par kadr to insaanon kee kar le ,
Janaaje mein kaandhe kiraaye par nahin mila karate....

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अभी तो देखना बाकी बहुत कुछ हैं सियासत में,
चुनावी दौर हैं कितने जनाज़े ये उठाएगी।

Abhee to dekhana baakee bahut kuchh hain siyaasat mein,
Chunaavee daur hain kitane janaaze ye uthaegee.

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Dard-bhari Shayari

शुक्र करो कि दर्द सहते हैं लिखते नहीं

शुक्र करो कि दर्द सहते हैं लिखते नहीं,
वर्ना कागजों पे लफ्जों के जनाजे उठते !!

Shukr karo ki dard sahate hain likhate nahin,
Varna kaagajon pe laphjon ke janaaje uthate !!

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Frequently Asked Questions

'जनाजे में कांधे किराये पर नहीं मिलते' वाली शायरी क्या सीख देती है?
"थोडी ही सही... पर कद्र तो इंसानों की कर ले, जनाजे में कांधे किराये पर नहीं मिला करते...." पंक्तियों में एक गहरी और मार्मिक सीख है — कि जीते-जी इंसानों की कद्र करनी चाहिए, क्योंकि आखिरी वक्त में साथ देने वाले कांधे पैसों से नहीं खरीदे जा सकते। यह भावुक संदेश Insaan शायरी के मानवीय मूल्यों से गहराई से जुड़ता है।
'पूरा शहर आया मेरे जनाजे में' वाली शायरी का असली मतलब क्या है?
"मुझे गुमनाम आशिक कहने वालो ये मंजर भी देख लो, पूरा शहर आया है मेरे जनाजे में !!" पंक्तियाँ उर्दू शायरी की एक जानी-मानी अतिशयोक्ति (हाइपरबोल) हैं — यहाँ "जनाज़ा" का मतलब सचमुच की मौत नहीं, बल्कि प्रेम में मशहूर होने या दिल टूटने की गहराई को नाटकीय अंदाज़ में बयान करना है, यह दिखाने के लिए कि उसका इश्क़ छिपा नहीं रहा।
सियासत में जनाज़ों की बात करने वाली शायरी क्या कहती है?
"अभी तो देखना बाकी बहुत कुछ हैं सियासत में, चुनावी दौर हैं कितने जनाज़े ये उठाएगी।" पंक्तियों में एक सामान्य टिप्पणी है कि आने वाला चुनावी दौर राजनीति में और भी उलटफेर (यानी सत्ता-परिवर्तन के रूपक में "जनाज़े") ला सकता है — यह किसी खास पार्टी या नेता का नाम लिए बिना एक व्यापक राजनीतिक टिप्पणी है।
'23 मई' वाली जनाज़े की शायरी में किस घटना का ज़िक्र है?
यह शायरी 2019 के आम चुनाव के नतीजों के आसपास के दौर की एक चुनावी Lafz-कला (वर्डप्ले) है, जिसमें "जनाज़ा" शब्द का इस्तेमाल एक पार्टी की चुनावी हार पर तंज़ कसने के लिए किया गया है। यह उस दौर के राजनीतिक माहौल की एक झलक भर है — इसे किसी तथ्य या इस पेज के अपने रुख के तौर पर नहीं, बल्कि उस वक्त की चुनावी बयानबाज़ी के एक नमूने के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
इस 'जनाज़े' शायरी संग्रह का मुख्य मिज़ाज़ क्या है?
इस संग्रह में ज़्यादातर शायरियाँ "जनाज़ा" शब्द का इस्तेमाल एक गहरे भावनात्मक या काव्यात्मक प्रतीक के तौर पर करती हैं — जैसे जीते-जी लोगों की कद्र करने की सीख, या प्रेम में मशहूर होने की नाटकीय अभिव्यक्ति। इनमें कही गई बातें Dard-bhari शायरी जैसी भावुक गहराई लिए हुए हैं, जो हर पाठक के दिल को छू सकती हैं।

Ek sher yahan ishq ke jazbaati andaaz mein poore shehar ke janaze mein aane ki baat karta hai, to doosra dabe hue dard ko kagaz par likhne se behtar maanta hai. Aage Dard-bhari aur Lafz shayari bhi padhein.