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Gudi Padwa Shayari

Most Famous Gudi Padwa Shayari of All Time!

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गुड़ी पड़वा शायरी का सबसे अच्छा संग्रह यहाँ उपलब्ध है, आप इस गुड़ी पड़वा शायरी को अपने हिंदी वाहट्सएप्प स्टेटस के रूप में उपयोग कर सकतें है या आप इस बेहतरीन गुड़ी पड़वा हिंदी शायरी को अपने दोस्तों को फेसबुक पर भी भेज सकतें हैं। गुड़ी पड़वा पर हिंदी के यह शेर, आपके प्यार और भावनाओं को व्यक्त करने में आपकी मदद कर सकतें हैं !!

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Gudi Padwa Shayari - गुड़ी पड़वा शायरी

कलियाँ चटकी नव सुमन खिले...
नववर्ष की नवबेला में उम्मीदों का उत्कर्ष मिले...!!

Kaliyaan chatakee nav suman khile...
Navavarsh kee navabela mein ummeedon ka utkarsh mile...!!

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नए साल की इतनी सी कहानी..
कैलेंडर नया और "कील" पुरानी !!

Nae saal kee itanee see kahaanee..
Kailendar naya aur "keel" puraanee !!

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न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आये...
ख़ुदा करे कि नया साल सबको रास आये...!!

Na koee ranj ka lamha kisee ke paas aaye...
Khuda kare ki naya saal sabako raas aaye...!!

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मुबारक मुबारक नया साल आया...
ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया...!!

Mubaarak mubaarak naya saal aaya...
Khushee ka samaan saaree duniya pe chhaaya...!!

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एक औऱ ईट गिर गई दीवार-ए-जिन्दगी से ।
नादान कह रहे हैं , नया साल मुबारक हो ।।

Ek aur eet gir gaee deevaar-e-jindagee se !!
Naadaan kah rahe hain , naya saal mubaarak ho !!

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कल भी वो बेहाल था,आज भी बेहाल है...
जैसा पुराना साल था,वैसा ही नया साल है...

Kal bhee vo behaal tha,aaj bhee behaal hai...
Jaisa puraana saal tha,vaisa hee naya saal hai...

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न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए
ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए........

Na koee ranj ka lamha kisee ke paas aae
Khuda kare ki naya saal sab ko raas aae........

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Frequently Asked Questions

गुड़ी पड़वा क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में मनाया जाने वाला परंपरागत नववर्ष है, जो चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को आता है। यह दिन प्रकृति में वसंत के आगमन, रबी फसल की कटाई और नए संवत्सर की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। घरों के बाहर 'गुड़ी' लगाकर सुख-समृद्धि और नई शुरुआत का स्वागत किया जाता है। शुभकामनाएं भेजने के लिए बहुत से लोग गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं साझा करना पसंद करते हैं।
गुड़ी पड़वा शायरी में बीते साल को विदा करने का भाव कैसे व्यक्त होता है?
कई शायरियाँ बीते पल को यादों में समेटकर नए साल के स्वागत की बात करती हैं, जैसे — "बीते पल अब यादों का हिस्सा हैं, आगे खुशियों का नया फ़रिश्ता हैं !! बाहे फैलाये करो नए साल का दीदार, आया हैं आया गुड़ी का त्यौहार !!" यहाँ अतीत को सम्मान देते हुए आगे की खुशियों का स्वागत किया गया है।
गुड़ी कैसे बनाई और सजाई जाती है?
गुड़ी बनाने के लिए एक लंबी बांस की छड़ी पर रेशमी या जरी लगी हुई नई साड़ी या कपड़ा लपेटा जाता है, ऊपर नीम की पत्तियां, आम के पत्ते और फूलों की माला बांधी जाती है, और सबसे ऊपर तांबे या चांदी का कलश उल्टा रखा जाता है। इस सजी हुई गुड़ी को घर के मुख्य द्वार या खिड़की के पास ऊंचा खड़ा किया जाता है, जो विजय, समृद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है।
गुड़ी पड़वा की शायरी में गुड़ी सजाने की रस्म का जिक्र कैसे किया जाता है?
गुड़ी को दिये और बाती से सजाने की परंपरा शायरी में इस तरह उतरती है — "मधुर संगीत का साज खिले, हर एक पल खुशियाँ ही खुशियाँ मिले, दिया बाती से सजाओ गुड़ी यह का पर्व, ऐसे ही रोशन रहे यह नव वर्ष !!" यह पंक्तियाँ घर के बाहर गुड़ी सजाने की रस्म को संगीत और उजाले के भाव से जोड़ती हैं।
गुड़ी पड़वा पर नीम की पत्तियां खाने की परंपरा का क्या महत्व है?
इस दिन नीम की कोमल पत्तियों को गुड़, इमली और जीरे के साथ मिलाकर खाने की प्रथा है। यह मिश्रण जीवन के कड़वे और मीठे दोनों अनुभवों को समान भाव से स्वीकार करने की सीख देता है, साथ ही आयुर्वेदिक दृष्टि से नीम को रक्त शुद्ध करने वाला और बदलते मौसम में रोगों से बचाने वाला माना जाता है, इसलिए इसे नए वर्ष की शुरुआत में स्वास्थ्यवर्धक शुभारंभ के रूप में देखा जाता है।
क्या गुड़ी पड़वा की शायरी इसे हिन्दू नव वर्ष के रूप में भी दर्शाती है?
हाँ, कई पंक्तियाँ इसे सीधे हिन्दू नव वर्ष के उत्सव के रूप में बयान करती हैं — "प्रेम और सौहाद्र से करते नव वर्ष का आगाज, सभी दिलो में प्रेम रहे और बढ़े ज्ञान रूपी प्रकाश !! नव वर्ष की बैला छाई है हर जगह, चलो मनाये हिन्दू नव वर्ष फिर एक साथ !!" इस तरह गुड़ी पड़वा को त्यौहार के साथ-साथ नव वर्ष के प्रतीक के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है।
गुड़ी पड़वा का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी, इसलिए इसे सृष्टि के नववर्ष के रूप में भी देखा जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह दिन शालिवाहन शक संवत की शुरुआत से भी जुड़ा है, जिसने राजा शालिवाहन की विजय का उत्सव मनाया था। महाराष्ट्र में कई परिवार इस दिन को छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृतियों से भी जोड़ते हैं। ऐसे भावों को शब्दों में पिरोने के लिए लोग अक्सर गुड़ी पड़वा शायरी का सहारा लेते हैं।
शायरी के अलावा गुड़ी पड़वा पर और क्या पढ़ा जा सकता है?
आप छोटे संदेशों के लिए Status कलेक्शन देख सकते हैं, या सीधे शुभकामनाएं भेजने के लिए Wishes पेज पर जा सकते हैं।
गुड़ी पड़वा 2027 में किस तारीख को है और यह तारीख हर साल क्यों बदलती है?
वर्ष 2027 में गुड़ी पड़वा 8 अप्रैल के आसपास मनाए जाने की संभावना है। चूंकि यह पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर आधारित है, और तिथियां चंद्र पंचांग से तय होती हैं, इसलिए हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीख में थोड़ा-बहुत बदलाव देखा जा सकता है। स्थानीय पंचांग से अंतिम तिथि की पुष्टि करना उचित रहता है।
गुड़ी पड़वा पर शुभकामनाएं भेजने और उत्सव मनाने के अच्छे तरीके क्या हैं?
पारंपरिक रूप से लोग सुबह तेल स्नान, घर की सफाई, रंगोली और गुड़ी की स्थापना के साथ दिन की शुरुआत करते हैं, फिर परिवार और मित्रों को संदेश भेजकर नववर्ष की बधाई देते हैं। आजकल डिजिटल माध्यम से भी लोग अपनों तक प्रेम पहुंचाते हैं - इसके लिए गुड़ी पड़वा स्टेटस साझा करना एक लोकप्रिय तरीका बन गया है।

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