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Gudi Padwa Status

New Year lines for Gudi Padwa.

Gudi Padwa marks the Hindu New Year, and these status lines carry the same fresh-start, new-year tone as the sample greetings people actually send that day. For a longer verse, see the Shayari page.

प्रेम और सौहाद्र से करते नव वर्ष का आगाज

प्रेम और सौहाद्र से करते नव वर्ष का आगाज
सभी दिलो में प्रेम रहे और बढ़े ज्ञान रूपी प्रकाश !!
नव वर्ष की बैला छाई है हर जगह
चलो मनाये हिन्दू नव वर्ष फिर एक साथ !!

Prem aur sauhaadr se karate nav varsh ka aagaaj
Sabhee dilo mein prem rahe aur badhe gyaan roopee prakaash !!
Nav varsh kee baila chhaee hai har jagah
Chalo manaaye hindoo nav varsh phir ek saath !!

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Frequently Asked Questions

गुड़ी पड़वा क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में मनाया जाने वाला परंपरागत नववर्ष है, जो चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को आता है। यह दिन प्रकृति में वसंत के आगमन, रबी फसल की कटाई और नए संवत्सर की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। घरों के बाहर 'गुड़ी' लगाकर सुख-समृद्धि और नई शुरुआत का स्वागत किया जाता है। शुभकामनाएं भेजने के लिए बहुत से लोग गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं साझा करना पसंद करते हैं।
गुड़ी पड़वा स्टेटस में हिन्दू नव वर्ष का भाव कैसे झलकता है?
“प्रेम और सौहाद्र से करते नव वर्ष का आगाज, सभी दिलो में प्रेम रहे और बढ़े ज्ञान रूपी प्रकाश !! नव वर्ष की बैला छाई है हर जगह, चलो मनाये हिन्दू नव वर्ष फिर एक साथ !!” — यह पंक्ति गुड़ी पड़वा को महाराष्ट्र के पारंपरिक नववर्ष के रूप में प्रेम और सौहार्द के संदेश के साथ मनाने की बात करती है। शुभकामनाओं के लिए विशेस पेज भी देखें।
गुड़ी कैसे बनाई और सजाई जाती है?
गुड़ी बनाने के लिए एक लंबी बांस की छड़ी पर रेशमी या जरी लगी हुई नई साड़ी या कपड़ा लपेटा जाता है, ऊपर नीम की पत्तियां, आम के पत्ते और फूलों की माला बांधी जाती है, और सबसे ऊपर तांबे या चांदी का कलश उल्टा रखा जाता है। इस सजी हुई गुड़ी को घर के मुख्य द्वार या खिड़की के पास ऊंचा खड़ा किया जाता है, जो विजय, समृद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है।
गुड़ी पड़वा और उगादी एक ही दिन मनाए जाने के बावजूद स्टेटस सामग्री अलग क्यों रखी गई है?
दोनों चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाए जाने वाले क्षेत्रीय नववर्ष ज़रूर हैं, पर गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र की परंपरा है जिसकी पहचान घर के बाहर फहराई जाने वाली गुड़ी (सजी हुई ध्वजदंड) है, जबकि उगादी आंध्र-कर्नाटक की परंपरा है जो छह स्वादों वाली उगादी पचड़ी पर केंद्रित है — इसलिए इनकी सामग्री जान-बूझकर अलग रखी गई है।
गुड़ी पड़वा पर नीम की पत्तियां खाने की परंपरा का क्या महत्व है?
इस दिन नीम की कोमल पत्तियों को गुड़, इमली और जीरे के साथ मिलाकर खाने की प्रथा है। यह मिश्रण जीवन के कड़वे और मीठे दोनों अनुभवों को समान भाव से स्वीकार करने की सीख देता है, साथ ही आयुर्वेदिक दृष्टि से नीम को रक्त शुद्ध करने वाला और बदलते मौसम में रोगों से बचाने वाला माना जाता है, इसलिए इसे नए वर्ष की शुरुआत में स्वास्थ्यवर्धक शुभारंभ के रूप में देखा जाता है।
क्या गुड़ी पड़वा स्टेटस में गुड़ी (ध्वज) की परंपरा का ज़िक्र होता है?
गुड़ी एक सजा हुआ बांस का डंडा होता है जिस पर चांदी या तांबे का लोटा, नीम के पत्ते और गेंदे की माला सजाकर घर के प्रवेश द्वार पर फहराया जाता है, जो विजय और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है — भले ही यह विशेष स्टेटस सीधे गुड़ी का ज़िक्र न करे, यह परंपरा गुड़ी पड़वा से जुड़ी अधिकतर सामग्री, जैसे हमारे शायरी संग्रह, का केंद्र बनी रहती है।
गुड़ी पड़वा का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी, इसलिए इसे सृष्टि के नववर्ष के रूप में भी देखा जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह दिन शालिवाहन शक संवत की शुरुआत से भी जुड़ा है, जिसने राजा शालिवाहन की विजय का उत्सव मनाया था। महाराष्ट्र में कई परिवार इस दिन को छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृतियों से भी जोड़ते हैं। ऐसे भावों को शब्दों में पिरोने के लिए लोग अक्सर गुड़ी पड़वा शायरी का सहारा लेते हैं।
गुड़ी पड़वा 2027 में किस तारीख को है और यह तारीख हर साल क्यों बदलती है?
वर्ष 2027 में गुड़ी पड़वा 8 अप्रैल के आसपास मनाए जाने की संभावना है। चूंकि यह पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर आधारित है, और तिथियां चंद्र पंचांग से तय होती हैं, इसलिए हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीख में थोड़ा-बहुत बदलाव देखा जा सकता है। स्थानीय पंचांग से अंतिम तिथि की पुष्टि करना उचित रहता है।
गुड़ी पड़वा पर शुभकामनाएं भेजने और उत्सव मनाने के अच्छे तरीके क्या हैं?
पारंपरिक रूप से लोग सुबह तेल स्नान, घर की सफाई, रंगोली और गुड़ी की स्थापना के साथ दिन की शुरुआत करते हैं, फिर परिवार और मित्रों को संदेश भेजकर नववर्ष की बधाई देते हैं। आजकल डिजिटल माध्यम से भी लोग अपनों तक प्रेम पहुंचाते हैं - इसके लिए गुड़ी पड़वा स्टेटस साझा करना एक लोकप्रिय तरीका बन गया है।

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