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Gudi Padwa Quotes

Spring's arrival, and the joy that follows.

These Gudi Padwa quotes echo the festival's spring imagery - happiness moving in as sorrow moves out - marking the Maharashtrian New Year. For a poetic take, see our Shayari collection.

सभी को दिल से गुड़ी पड़वा की बधाई

आई हैं बहारे, नाचे हम और तुम
पास आये, खुशियाँ और दूर जाए गम
प्रकृति की लीला हैं छाई
सभी को दिल से गुड़ी पड़वा की बधाई !!

Aaee hain bahaare, naache ham aur tum
Paas aaye, khushiyaan aur door jae gam
Prakrti kee leela hain chhaee
Sabhee ko dil se gudee padava kee badhaee !!

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Frequently Asked Questions

गुड़ी पड़वा क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में मनाया जाने वाला परंपरागत नववर्ष है, जो चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को आता है। यह दिन प्रकृति में वसंत के आगमन, रबी फसल की कटाई और नए संवत्सर की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। घरों के बाहर 'गुड़ी' लगाकर सुख-समृद्धि और नई शुरुआत का स्वागत किया जाता है। शुभकामनाएं भेजने के लिए बहुत से लोग गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं साझा करना पसंद करते हैं।
गुड़ी पड़वा के कोट्स में किस तरह के भाव व्यक्त किए जाते हैं?
इस दिन के कोट्स में वसंत ऋतु के आगमन, प्रकृति के नवजीवन और घर-घर में खुशियों के स्वागत का भाव झलकता है, जैसे — "आई हैं बहारे, नाचे हम और तुम, पास आये, खुशियाँ और दूर जाए गम, प्रकृति की लीला हैं छाई, सभी को दिल से गुड़ी पड़वा की बधाई !!" यह पंक्तियाँ बहार, उल्लास और गम के दूर होने की भावना को समेटे हुए हैं।
गुड़ी कैसे बनाई और सजाई जाती है?
गुड़ी बनाने के लिए एक लंबी बांस की छड़ी पर रेशमी या जरी लगी हुई नई साड़ी या कपड़ा लपेटा जाता है, ऊपर नीम की पत्तियां, आम के पत्ते और फूलों की माला बांधी जाती है, और सबसे ऊपर तांबे या चांदी का कलश उल्टा रखा जाता है। इस सजी हुई गुड़ी को घर के मुख्य द्वार या खिड़की के पास ऊंचा खड़ा किया जाता है, जो विजय, समृद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है।
क्या गुड़ी पड़वा और उगादी एक ही पर्व हैं?
हाँ, दोनों एक ही खगोलीय नववर्ष का उत्सव हैं, बस क्षेत्रीय नाम अलग हैं — महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा कहा जाता है और घर के बाहर रेशमी वस्त्र व नीम की पत्तियों से सजी 'गुड़ी' फहराई जाती है, जबकि तेलुगु व कन्नड़ भाषी क्षेत्रों में यही दिन उगादी के नाम से मनाया जाता है, जहाँ 'उगादी पचड़ी' नामक विशेष व्यंजन बनाया जाता है।
गुड़ी पड़वा पर नीम की पत्तियां खाने की परंपरा का क्या महत्व है?
इस दिन नीम की कोमल पत्तियों को गुड़, इमली और जीरे के साथ मिलाकर खाने की प्रथा है। यह मिश्रण जीवन के कड़वे और मीठे दोनों अनुभवों को समान भाव से स्वीकार करने की सीख देता है, साथ ही आयुर्वेदिक दृष्टि से नीम को रक्त शुद्ध करने वाला और बदलते मौसम में रोगों से बचाने वाला माना जाता है, इसलिए इसे नए वर्ष की शुरुआत में स्वास्थ्यवर्धक शुभारंभ के रूप में देखा जाता है।
गुड़ी पड़वा पर कोट्स के साथ और क्या साझा किया जा सकता है?
कोट्स के अलावा आप भावनाओं को शायराना अंदाज़ में कहने के लिए हमारा Shayari संग्रह देख सकते हैं, या अपनों को सीधा संदेश भेजने के लिए Wishes कलेक्शन का उपयोग करें।
गुड़ी पड़वा का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी, इसलिए इसे सृष्टि के नववर्ष के रूप में भी देखा जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह दिन शालिवाहन शक संवत की शुरुआत से भी जुड़ा है, जिसने राजा शालिवाहन की विजय का उत्सव मनाया था। महाराष्ट्र में कई परिवार इस दिन को छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृतियों से भी जोड़ते हैं। ऐसे भावों को शब्दों में पिरोने के लिए लोग अक्सर गुड़ी पड़वा शायरी का सहारा लेते हैं।
गुड़ी पड़वा 2027 में किस तारीख को है और यह तारीख हर साल क्यों बदलती है?
वर्ष 2027 में गुड़ी पड़वा 8 अप्रैल के आसपास मनाए जाने की संभावना है। चूंकि यह पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर आधारित है, और तिथियां चंद्र पंचांग से तय होती हैं, इसलिए हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीख में थोड़ा-बहुत बदलाव देखा जा सकता है। स्थानीय पंचांग से अंतिम तिथि की पुष्टि करना उचित रहता है।
गुड़ी पड़वा पर शुभकामनाएं भेजने और उत्सव मनाने के अच्छे तरीके क्या हैं?
पारंपरिक रूप से लोग सुबह तेल स्नान, घर की सफाई, रंगोली और गुड़ी की स्थापना के साथ दिन की शुरुआत करते हैं, फिर परिवार और मित्रों को संदेश भेजकर नववर्ष की बधाई देते हैं। आजकल डिजिटल माध्यम से भी लोग अपनों तक प्रेम पहुंचाते हैं - इसके लिए गुड़ी पड़वा स्टेटस साझा करना एक लोकप्रिय तरीका बन गया है।

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