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Gubbare Shayari

Kabhi azaadi ka gumaan, kabhi khushi ka gubbara, sab bikta hai.

Gubbare shayari mein hawa ko bhi apni azaadi par gumaan tha, magar kisi ne use gubbare mein bhar kar hi bech diya, ye vyangya jeevan ke kayi rishton par bhi fit baithta hai. Isi khushi mein Chocolate shayari bhi padhein.

Gubbare Shayari - Khushi Aur Yaadon Ke Sher

हवा को गुमान था अपनी आज़ादी पर...
किसी ने उसे भी गुब्बारे में भर के बेच दिया...!!

Hava ko gumaan tha apanee aazaadee par...
Kisee ne use bhee gubbaare mein bhar ke bech diya...!!

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चॉकलेट की खुशबू,
आइसक्रीम की मिठास,
प्यार की मस्ती
और हाथों का स्वाद
हसी के गुब्बारे और तुम्हारा साथ,
मुबारक हो आपको टेडी डे का त्यौहार !

Chokalet kee khushaboo,
Aaisakreem kee mithaas,
Pyaar kee mastee
Aur haathon ka svaad
Hasee ke gubbaare aur tumhaara saath,
Mubaarak ho aapako tedee de ka tyauhaar !

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मुझ पे गिरते है रोज तेरी यादों के गुब्बारे

मुझ पे गिरते है रोज तेरी यादों के गुब्बारे
मैं नहीं मानती साल मे होली एक बार होती है !!

Mujh pe girate hai roj teree yaadon ke gubbaare
Main nahin maanatee saal me holee ek baar hotee hai !!

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एक उड़ते हुए गुब्बारे पे क्या खूब लिखा था
वो जो बाहर है वह नहीं, वह जो भीतर है वही आपको ऊपर ले जाता है.......

Ek udate hue gubbaare pe kya khoob likha tha
Vo jo baahar hai vah nahin, vah jo bheetar hai vahee aapako oopar le jaata hai.......

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Frequently Asked Questions

आज़ाद हवा को गुब्बारे में कैद करने वाली पंक्ति का क्या मतलब है?
एक व्यंग्यात्मक पंक्ति में कहा गया है, ‘हवा को गुमान था अपनी आज़ादी पर... किसी ने उसे भी गुब्बारे में भर के बेच दिया...!!’ यहां आज़ाद समझी जाने वाली हवा को भी कैद करके बेच दिए जाने का ज़िक्र है, जो घमंड की सीमा को दर्शाता है।
टेडी डे से जुड़ी गुब्बारे वाली शायरी में क्या भावनाएं हैं?
एक रोमांटिक पंक्ति में कहा गया है, ‘चॉकलेट की खुशबू, आइसक्रीम की मिठास, प्यार की मस्ती और हाथों का स्वाद हसी के गुब्बारे और तुम्हारा साथ, मुबारक हो आपको टेडी डे का त्यौहार !’ यह पंक्ति वैलेंटाइन सप्ताह की मिठास और खुशियों को दर्शाती है, जो Chocolate शायरी के भाव से भी जुड़ती है।
यादों को गुब्बारे से जोड़ने वाली पंक्ति में क्या दर्द छुपा है?
‘मुझ पे गिरते है रोज तेरी यादों के गुब्बारे मैं नहीं मानती साल मे होली एक बार होती है !!’ यह पंक्ति बताती है कि प्रियजन की यादें रोज़ ही होली के रंगों की तरह बरसती हैं, न कि साल में सिर्फ एक बार।
उड़ते गुब्बारे वाली आखिरी पंक्ति का जीवन दर्शन क्या है?
‘एक उड़ते हुए गुब्बारे पे क्या खूब लिखा था वो जो बाहर है वह नहीं, वह जो भीतर है वही आपको ऊपर ले जाता है.......’ यह पंक्ति सिखाती है कि बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि भीतर का हल्कापन और सकारात्मकता ही इंसान को ऊंचाइयों तक ले जाती है, जो Haath शायरी के भाव से भी जुड़ती है।
क्या इस संग्रह की रचनाएं हिंदी में सरल भाषा में हैं?
हां, यह सभी रचनाएं सहज Hindi भाषा में हैं और आप जैसे पाठकों के लिए Aap शायरी में भी इसी तरह के भाव मिल सकते हैं।

Ek sher yahan yaadon ke gubbare roz girte rehne ki baat karta hai, ye maankar ki khushi saal mein sirf ek baar holi jaisi nahi hoti, to doosra ek udte gubbare se seekh deta hai ki jo bhitar hai wahi upar le jaata hai. Aage Haar aur Haath shayari bhi padhein.