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Maidan Shayari

Zindagi ke maidan mein himmat hi sabse badi jeet hai.

Maidan shayari mein zindagi ke maidan mein duaon ka lashkar leke khadi himmat dikhti hai, to kabhi khule maidano mein daudte bachpan ki masoom yaadein. Isi himmat mein Bachpan shayari bhi padhein.

Maidan Shayari - Himmat Aur Bachpan Ke Sher

हम ऐसे घबराये इश्क के मैदान में,
की नो बॉल पे भी रन आउट हो गए !!

Ham aise ghabaraaye ishk ke maidan mein,
Ki no ball pe bhee ran out ho gaye !!

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रग रग में है जो बिखरी
वो खुशबु तुम्हारी है,
मैदान-ए-इश्क़ की बाज़ी
इस दिल ने भी हारी है,
मुझे यूँ छोड़ जा बेशक भले
पर भूल ना पाओगी,
तेरे हर शिकवे पर भारी
ये मोहब्ब्त हमारी है।

Rag Rag Mein Hai Jo Bikhri
Woh Khushbu Tumhari Hai,
Maidan-e-Ishq Ki Baazi
Iss Dil Ne Bhi Haari Hai,
Mujhe Yun Chhod Ja Beshak Bhale
Par Bhool Na Paogi,
Tere Har Shikwe Par Bhaari
Yeh Mohabbat Humari Hai.

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दौड़ने दो खुले मैदानो मैं नन्ने कदमों को जनाब

दौड़ने दो खुले मैदानो मैं नन्ने कदमों को जनाब
ज़िंदगी बहोत भगाती है बचपन गुज़र जाने के बाद

Daudane do khule maidaano main nanne kadamon ko janaab
Zindagee bahot bhagaatee hai bachapan guzar jaane ke baad

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ना डरा मुझे ऐ वक़्त नाकाम होगी तेरी हर कोशिशे...
ज़िन्दगी के मैदान में खडी हूँ , दुआओं का लश्कर लेकर...!!

Na dara mujhe ai vaqt naakaam hogee teree har koshishe...
Zindagee ke maidaan mein khadee hoon , duaon ka lashkar lekar...!!

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Aadat Shayari

हराना है तो मैदान में आके हराना

हराना है तो मैदान में आके हराना...
वरना दिल जीतने की आदत तो बचपन से है...!!

Haraana hai to maidaan mein aake haraana...
Varana dil jeetane kee aadat to bachapan se hai...!!

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Frequently Asked Questions

मैदान शायरी में यह शब्द किन-किन तरीकों से इस्तेमाल होता है?
मैदान शायरी में यह शब्द कभी क्रिकेट के मैदान जैसी मज़ाकिया तुलना में इश्क़ को बयां करने के लिए आता है, तो कभी जिंदगी और मोहब्बत को एक जंग के मैदान की तरह दिखाने के लिए।
इश्क के मैदान में क्रिकेट की तुलना वाली शायरी में क्या मज़ाक है?
'हम ऐसे घबराये इश्क के मैदान में, की नो बॉल पे भी रन आउट हो गए!!' पंक्ति क्रिकेट के मैदान की शब्दावली को इश्क़ में हुई नर्वस गलतियों से जोड़कर एक चुटीला मज़ाक बनाती है।
मैदान-ए-इश्क़ में दिल के हारने वाली शायरी क्या बयां करती है?
'मैदान-ए-इश्क़ की बाज़ी इस दिल ने भी हारी है, मुझे यूँ छोड़ जा बेशक भले पर भूल ना पाओगी' पंक्ति में मोहब्बत को एक जंग के मैदान की तरह दिखाया गया है, जहां दिल हार भी जाए तो भी उस याद को कोई मिटा नहीं पाता।
बचपन के खुले मैदानों को याद करने वाली शायरी में क्या भाव है?
'दौड़ने दो खुले मैदानो मैं नन्ने कदमों को जनाब, ज़िंदगी बहोत भगाती है बचपन गुज़र जाने के बाद' पंक्ति उस मासूम आज़ादी को याद करती है, जो सिर्फ बचपन के खुले मैदानों में खेलते हुए मिलती है, बड़े होने के बाद जिंदगी की भागदौड़ में जो कहीं खो जाती है।
जिंदगी के मैदान में दुआओं के सहारे डटे रहने वाली शायरी क्या सिखाती है?
'ना डरा मुझे ऐ वक़्त नाकाम होगी तेरी हर कोशिशे... ज़िन्दगी के मैदान में खडी हूँ, दुआओं का लश्कर लेकर' पंक्ति सिखाती है कि मुश्किल वक्त के सामने डटे रहने के लिए दुआओं का हौसला ही सबसे बड़ा साथी है।

Ek sher yahan mazakiya andaaz mein ishq ke maidan ko cricket se joda hai, to doosra maidan mein aakar haraane ki chunauti deta hai kyunki dil jeetna to bachpan ki aadat hai. Aage Cricket aur Aadat shayari bhi padhein.