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Ginti Shayari

Kismat chhapne ki na sahi, khuddaaron mein ginti zaroor hai.

Ginti shayari mein ab saanson ki bhi ginti reh gayi hai, aur takiye se uthna tak mushkil ho gaya hai. Isi ehsaas mein Aaj shayari bhi padhein.

Ginti Shayari - Khuddaari Aur Ehsaas Ke Sher
कपड़े सुखाने उसने गिनती के चार थे

कपड़े सुखाने उसने गिनती के चार थे...
सौ बार छत पे आई और मै न समझ सका..!!

Kapade sukhaane usane ginatee ke chaar the...
Sau baar chhat pe aaee aur mai na samajh saka..!!

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अब न उठना सरहाने से मेरे...
अब तो गिनती के दम रह गए हैं...!!!

Ab na uthana sarahaane se mere...
Ab to ginatee ke dam rah gae hain...!!!

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कमियों की गिनती जिस तरह करते है वो,
इंसान हो कर भी आप खुदा बन बैठे हो जैसे..

Kamiyon kee ginatee jis tarah karate hai vo,
Insaan ho kar bhee aap khuda ban baithe ho jaise..

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माना कि हम छप ना पाए पुस्तक या अख़बारों में
लेकिन ये क्या कम है अपनी गिनती है खुद्दारों में

Maana ki ham chhap na pae pustak ya akhabaaron mein
Lekin ye kya kam hai apanee ginatee hai khuddaaron mein

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Frequently Asked Questions

"गिनती के चार" कपड़े वाली पंक्ति में क्या रोमांटिक शरारत छिपी है?
"कपड़े सुखाने उसने गिनती के चार थे... सौ बार छत पे आई और मै न समझ सका..!!" यह एक हल्के-फुल्के मज़ाकिया अंदाज़ में लिखी गई पंक्ति है, जो बताती है कि बहाने से बार-बार छत पर आने के पीछे असल वजह प्यार का इशारा था, जिसे शायर समझ ही नहीं पाया।
"गिनती के दम" रह जाने का क्या मतलब है?
"अब न उठना सरहाने से मेरे... अब तो गिनती के दम रह गए हैं...!!!" यह पंक्ति ज़िंदगी के आखिरी पलों या बेहद कमज़ोर हो चुकी हालत को दर्शाती है, जहाँ सांसें भी अब गिनी-चुनी रह गई हैं।
कमियां गिनने वालों पर यह शायरी क्या तंज़ कसती है?
"कमियों की गिनती जिस तरह करते है वो, इंसान हो कर भी आप खुदा बन बैठे हो जैसे.." यह पंक्ति उन Insaan पर व्यंग्य करती है जो हमेशा दूसरों की कमियां गिनते रहते हैं, मानो वे खुद भगवान की तरह हर किसी को जज करने का हक रखते हों।
खुद्दारों में गिनती होने की बात किस अंदाज़ में कही गई है?
"माना कि हम छप ना पाए पुस्तक या अख़बारों में लेकिन ये क्या कम है अपनी गिनती है खुद्दारों में" यह पंक्ति आत्मसम्मान और खुद्दारी पर गर्व जताती है, भले ही शोहरत न मिली हो, लेकिन खुद्दार लोगों की फेहरिस्त में नाम होना ही काफी है — यह भाव Attitude शायरी से भी मेल खाता है।
"गिनती" थीम की शायरी को किस रूप में सबसे ज्यादा पढ़ा जाता है?
इसकी मज़ाकिया और आत्मसम्मान भरी दोनों तरह की पंक्तियों को अक्सर संक्षिप्त 2 Line अंदाज़ में शेयर किया जाता है।

Ek sher yahan doosron ki kamiyon ki ginti karne walon par tanz kasta hai jo insaan hote hue bhi khud ko khuda maan baithe hain, to doosra kitaabon mein chhap na paane ka afsos na karte hue khuddaron mein apni ginti hone ka fakhr karta hai. Aage Attitude aur Ham shayari bhi padhein.