Kursee Shayari
Kuch kar nahi sakte to kursee se utar kyun nahi jaate, ek seedha sawaal.
Kursee shayari mein ek seedha sawaal uthaya gaya hai ki kursee koi janaza to nahi, phir kuch kar nahi sakte to us par tike rehne ki zid kyun. Isi sawaal mein Ghar shayari bhi padhein.
कुर्सी है, तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है,
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।
Kursee hai, tumhaara ye janaaza to nahin hai,
Kuchh kar nahin sakate to utar kyon nahin jaate.
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Frequently Asked Questions
'कुर्सी है, जनाज़ा तो नहीं' वाली शायरी में क्या तंज़ किया गया है?
"कुर्सी है, तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है, कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।" पंक्तियों में सत्ता की कुर्सी पर बैठे उन लोगों पर तंज़ किया गया है जो काम न कर पाने के बावजूद पद नहीं छोड़ते। यहाँ कुर्सी की तुलना जनाज़े से करके यह कहा गया है कि पद से चिपके रहना ज़रूरी नहीं, इस्तीफ़ा देना कोई मौत नहीं है।
क्या यह 'कुर्सी' शायरी किसी खास नेता को निशाना बनाती है?
नहीं, यह एक आम, दो पंक्तियों की तीखी टिप्पणी है, जो सत्ता की कुर्सी से चिपके रहने की मानसिकता पर सामान्य रूप से व्यंग्य करती है, बिना किसी खास व्यक्ति या पार्टी का नाम लिए। इसका संक्षिप्त और सीधा अंदाज़ 2 Line शायरी की खासियत जैसा ही है।
