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Anaj Shayari

Kisan hai to yodha, bhookh garibi se ladkar anaj ugana hi uski asli jung hai.

Anaj shayari mein mushibat mein bhi muskurate hue bhookh garibi se ladkar khet mein anaj ugane wale kisan ko yodha maan kar samman diya gaya hai. Isi samman mein Garibi shayari bhi padhein.

उस किसान को मैं योद्धा मानता हूँ
जो मुसीबत में भी मुस्कुराता है,
जो भूख-गरीबी से लड़कर
अपने खेतों में अनाज उगाता है.

Us kisaan ko main yoddha maanata hoon,
Jo museebat mein bhee muskuraata hai !!
Jo bhookh-gareebee se ladakar,
Apne kheton mein anaaj ugaata hai !!

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बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की.

Badh rahi hain keemate anaaj ki,
Par ho na saki vida Beti kisaan ki.

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Frequently Asked Questions

किसान को योद्धा कहने वाली अनाज शायरी में क्या भाव है?
एक शायरी में लिखा है, "उस किसान को मैं योद्धा मानता हूँ जो मुसीबत में भी मुस्कुराता है, जो भूख-गरीबी से लड़कर अपने खेतों में अनाज उगाता है।" यह किसान की मेहनत और हौसले को एक योद्धा की लड़ाई जैसा सम्मान देती है, जो Garibi से जूझते हुए भी हार नहीं मानता।
अनाज की बढ़ती कीमत और बेटी की शादी वाली शायरी का क्या दर्द है?
शेर कहता है, "बढ़ रही हैं कीमते अनाज की, पर हो न सकी विदा बेटी किसान की।" यह किसान परिवार की उस मजबूरी को दिखाता है जहाँ अनाज के दाम तो बढ़ते हैं, पर उतनी कमाई न होने से बेटी की शादी जैसी ज़िम्मेदारी अटकी रह जाती है - Keemat बढ़ने का असली बोझ किसान पर ही पड़ता है।
अनाज शायरी में किसान की ज़िंदगी को किस नज़रिए से दिखाया गया है?
दोनों सैंपल शायरियों में अनाज सिर्फ फसल नहीं, बल्कि किसान की मेहनत, संघर्ष और परिवार की ज़िम्मेदारियों का प्रतीक बनकर आता है - चाहे भूख-गरीबी से लड़ने की बात हो या Beti की विदाई रुकने का दर्द, दोनों किसान की असली ज़िंदगी की सच्चाई बयां करते हैं।

Ek sher yahan anaj ki badhti keemat ke bawajood kisan ki beti ki vida na ho paane ka gehra dard bayan karta hai. Aage Aaj aur Beti shayari bhi padhein.