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श्रेष्ठता पर अनमोल वचन

स्वयं को श्रेष्ठ बनाने और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरक सोच।

स्वयं को हमेशा सर्वश्रेष्ठ मानने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे सचमुच वैसा ही बनता चला जाता है, क्योंकि सोच ही आगे चलकर व्यवहार गढ़ती है। खुद को हर चुनौती के सामने परखना ही स्वयं को पहचानने का सबसे उम्दा ज़रिया माना गया है।

आप हमेशा खुद को सर्वश्रेष मानिए और एक दिन सही में आप सर्वश्रेष्ठ होंगे।

Aap hamesha khud ko sarvshresth maniye aur ek din sahi me aap sarvshresth honhe.

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रिश्ता बहुत गहरा हो या न हो
लेकिन
भरोसा बहुत गहरा होना चाहिये.
गुरु वही श्रेष्ठ होता है जिसकी प्रेरणा से
किसी का चरित्र बदल जाये
और..
मित्र वही श्रेष्ठ होता है
जिसकी संगत से रंगत बदल जाये ।"

"गुरु...

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स्वयं को जानने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है,
स्वयं को औरों की सेवा में डुबो देना...

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जिस काम में सफल होने की संभावना ज्यादा हो उसको करने पर हम सफल होते है, लेकिन जिस काम में असफलता की संभावना ज्यादा हो उसको करने पर हम श्रेष्ठ होते है ।

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Bhaav Shayari

साधारण और श्रेष्ठ में सिर्फ इतना सा अंतर है की साधारण उसको चुनते है जो आसान है लेकिन श्रेष्ठ उसे चुनता है जो मुश्किल है ।

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अपने आप को चुनौती देने का प्रत्येक प्रयास अपने आप को जानने के लिए श्रेष्ठ प्रयास है ।

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हर दिन मेरा सर्वश्रेष्ठ दिन है
यह मेरी जिन्दगी है
मेरे पास यह क्षण दुबारा नहीं होगा

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मुसीबतों से भागना किसी समस्या का हल नहीं हो सकता है, इसलिए आपको हर समस्या का सामना करना चाहिए…. यही सर्वश्रेष्ठ विकल्प है….

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Frequently Asked Questions

What role does self-belief play in becoming excellent, per this sample?
Consider yourself the best, the quote says, and one day you truly will be - framing self-belief as a step toward actually becoming excellent.
How are an excellent guru and an excellent friend each defined here?
An excellent guru is one whose inspiration changes someone's character, and an excellent friend is one whose company changes your outlook - both framed around a Guru Purnima theme of trust running deeper than the relationship itself. More greetings appear under Guru Purnima.
What actually separates 'ordinary' from 'excellent' in this topic?
The only difference, the sample says, is that the ordinary choose what's easy while the excellent choose what's difficult.

गुरु वही श्रेष्ठ कहलाता है जिसकी प्रेरणा किसी के चरित्र में बदलाव ला दे, और मित्र वही जिसकी संगत से जीवन की दिशा निखर जाए। ऐसे रिश्तों की नींव गहरे भरोसे पर टिकी होती है, तभी वे सच में श्रेष्ठ बन पाते हैं।