Logo - Feel The Words

Rabba Shayari

Rabba se ek hi gujarish, mera dard kam kar de.

Rabba shayari mein rabba se apni kahani ka anjaam maangne aur kafan ka intezaam karne tak ki dua ki jaati hai. Isi ehsaas mein Kuch shayari bhi padhein.

मुझपे भी कर एक एहसान रब्बा,
कर दे मेरी कहानी का अंजाम रब्बा।
सारी दुनिया को देता है कुछ ना कुछ,
कर दे मेरे लिए भी कफ़न का इंतज़ाम रब्बा।।

Mujhape bhee kar ek ehasaan rabba,
Kar de meree kahaanee ka anjaam rabba.
Saaree duniya ko deta hai kuchh na kuchh,
Kar de mere lie bhee kafan ka intazaam rabba..

Read more...

ओ मेरे रब्बा मेरे यार से मिला दे,
मुझे मरने से पहले !!
ओ मेरे रब्बा मेरे प्यार से मिला दे,
मुझे मरने से पहले !!

O mere rabba mere yaar se mila de,
Mujhe marane se pahale !!
O mere rabba mere pyaar se mila de,
Mujhe marane se pahale !!

Read more...

रब्बा मेरे
इस बार इतनी खुशिया न दे तू
मैं जान गई हूँ तेरी फितरत
ग़म हर बार दुगना देता है तू

Rabba mere
Is baar itanee khushiya na de too
Main jaan gaee hoon teree phitarat
Gam har baar dugana deta hai too

Read more...

Related Shayari Topics for You.

Frequently Asked Questions

रब्बा शायरी में "रब्बा" शब्द का क्या भाव है?
"रब्बा" पंजाबी और उर्दू परंपरा में ईश्वर को संबोधित करने का एक आत्मीय, भावुक तरीका है। इस टॉपिक की शायरी में यह शब्द गहरी वेदना, शिकायत और उम्मीद — तीनों भावों के साथ भगवान से सीधा संवाद करने के लिए इस्तेमाल होता है, जैसे कोई अपने सबसे करीबी से दिल की बात कह रहा हो।
"कर दे मेरी कहानी का अंजाम रब्बा" पंक्ति में क्या गहरी वेदना छुपी है?
यह पंक्ति गहरे दर्द और निराशा के क्षण में लिखी गई एक भावुक प्रार्थना जैसी है — "मुझपे भी कर एक एहसान रब्बा, कर दे मेरी कहानी का अंजाम रब्बा। सारी दुनिया को देता है कुछ ना कुछ, कर दे मेरे लिए भी कफ़न का इंतज़ाम रब्बा।।" उर्दू-पंजाबी शायरी की एक पुरानी परंपरा में दर्द की पराकाष्ठा को इसी तरह अतिशयोक्ति के ज़रिए ईश्वर से शिकायत के रूप में व्यक्त किया जाता है — यह जीवन की गहन पीड़ा की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, कोई शाब्दिक इच्छा नहीं।
"इस बार इतनी खुशिया न दे तू" पंक्ति में भगवान से क्या शिकायत की गई है?
यह पंक्ति एक मार्मिक, कड़वे अनुभव से उपजी शिकायत है — "रब्बा मेरे, इस बार इतनी खुशिया न दे तू, मैं जान गई हूँ तेरी फितरत, ग़म हर बार दुगना देता है तू।" यानी बार-बार खुशी के बाद दोगुना ग़म झेलने के डर से, इंसान भगवान से सीधे विनती करता है कि इस बार कम ही खुशी दे — यह भावनात्मक थकान की एक बेहद ईमानदार अभिव्यक्ति है।
"मेरे यार से मिला दे, मुझे मरने से पहले" पंक्ति में क्या प्रार्थना है?
यह पंक्ति एक गहरी, आस्थामय प्रार्थना है — "ओ मेरे रब्बा मेरे यार से मिला दे, मुझे मरने से पहले!! ओ मेरे रब्बा मेरे प्यार से मिला दे, मुझे मरने से पहले!!" यानी जीवन के अंत से पहले अपने प्रिय से एक बार मिलने की सबसे बड़ी ख्वाहिश ईश्वर के सामने रखी गई है। ऐसी ही भावुक शायरी Kuch टॉपिक पर भी मिल सकती है।

Ek sher yahan rabba se khushiyon ki jagah kam gam maangne ki fariyaad hai, kyunki fitrat gam hi dugna deti hai, aur mar ne se pehle apne yaar se milane ki aakhri gujarish bhi.