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Mela Shayari

Kandhon par baithkar dekha mela, ab bhi yaad hai.

Mela shayari in Hindi mein Pongal ke rangbirange utsav se lekar Sawan mein Nag Panchami ke mele tak, khushiyon ka rela dikhai deta hai. Isi khushi mein Badhai shayari bhi padhein.

खुशियों का रंगबिरंगा रेला है
पोंगल सिर्फ एक पर्व नहीं
ये तो उत्सव का मेला है.

Khushiyon ka rangabiranga rela hai
Pongal sirph ek parv nahin
Ye to utsav ka mela hai.

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अगर बेटा बाप के कंधे तक आने लगे
तो बेटे को समझ लेना चाहिए कि
जिस कंधे पर बैठ कर मेला देखा अब उस
कंधे का कर्ज चुकाने का समय आ गया है.

Agar beta baap ke kandhe tak aane lage
To bete ko samajh lena chaahie ki
Jis kandhe par baith kar mela dekha ab us
Kandhe ka karj chukaane ka samay aa gaya hai.

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आई है सावन के महीने में
नाग-पंचमी की पावन बेला
आओ सब मिलकर इसे मनाएं
और साथ में जाएँ देखने मेला.
बधाई हो नाग-पंचमी की …..

Aaee hai saavan ke maheene mein
Naag-panchamee kee paavan bela
Aao sab milakar ise manaen
Aur saath mein jaen dekhane mela.
Badhaee ho naag-panchamee kee …..

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क्यूं बोझ हो जाते है वो झुके हुए कंधे साहब,
जिन पर चढ़कर तुम कभी मेला देखा करते थे।

Kyoon bojh ho jaate hai vo jhuke hue kandhe saahab,
Jin par chadhakar tum kabhee mela dekha karate the.

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2 Line Shayari

क्यूँ बोझ हो जाते हैं झुके हुए कांधे...
जिन पर चढकर कभी मेला देखा करते थे...!!

Kyoon bojh ho jaate hain jhuke hue kaandhe...
Jin par chadhakar kabhee mela dekha karate the...!!

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Frequently Asked Questions

mela shayari in hindi 2 line जैसी छोटी शायरी इस संग्रह में है क्या?
हां, "क्यूं बोझ हो जाते है वो झुके हुए कंधे साहब, जिन पर चढ़कर तुम कभी मेला देखा करते थे।" जैसी दो पंक्तियों की शायरी यहां मौजूद है। इसी अंदाज़ की और शायरी के लिए 2 Line कलेक्शन देखा जा सकता है।
मेला शायरी में सबसे ज्यादा किस भाव पर जोर दिया गया है?
इस कलेक्शन में मेला सिर्फ त्योहार की रौनक नहीं बल्कि रिश्तों की गहराई दिखाने का जरिया भी है, खासकर पिता के कंधे पर बैठकर मेला देखने और बड़े होकर उसका “कर्ज” चुकाने वाली भावुक पंक्तियाँ। ऐसे रिश्तों पर और शायरी आपको Beta Shayari में मिलेगी।
मेला और पिता-पुत्र के रिश्ते को जोड़ने वाली कौन सी शायरी है?
"अगर बेटा बाप के कंधे तक आने लगे तो बेटे को समझ लेना चाहिए कि जिस कंधे पर बैठ कर मेला देखा अब उस कंधे का कर्ज चुकाने का समय आ गया है." पंक्तियां बेटे के बड़े होने पर पिता के कंधों का कर्ज चुकाने की बात करती हैं। इसी भाव की Beta शायरी भी देखी जा सकती है।
क्या मेला शायरी सिर्फ त्योहारों के लिए है?
नहीं, इसमें पोंगल और नागपंचमी जैसे त्योहारों की खुशियाँ तो हैं ही, साथ ही कुछ शेर मेले की यादों को भावुक अंदाज़ में भी पिरोते हैं। त्योहारों की बधाई देने के लिए आप हमारी Badhai Shayari भी देख सकते हैं।
क्या नाग-पंचमी पर मेला शायरी भी इस टॉपिक में शामिल है?
हां, "आई है सावन के महीने में नाग-पंचमी की पावन बेला आओ सब मिलकर इसे मनाएं और साथ में जाएँ देखने मेला. बधाई हो नाग-पंचमी की ….." पंक्तियां सावन में नाग-पंचमी के मेले की बधाई देती हैं। ऐसे मौकों की Badhai शायरी अलग से भी उपलब्ध है।
2 लाइन में मेला शायरी हिंदी में मिलेगी क्या?
हां, कलेक्शन की कई पंक्तियाँ छोटी और सीधी हैं, जैसे “क्यूं बोझ हो जाते है वो झुके हुए कंधे साहब, जिन पर चढ़कर तुम कभी मेला देखा करते थे”, जो दो पंक्तियों में ही गहरी बात कह देती हैं। ऐसी छोटी पंक्तियों का खजाना 2 Line Shayari में भी मिलेगा।
पोंगल पर्व को मेला कहकर कौन सी शायरी लिखी गई है?
"खुशियों का रंगबिरंगा रेला है पोंगल सिर्फ एक पर्व नहीं ये तो उत्सव का मेला है." पंक्तियां पोंगल को सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि रंगबिरंगे उत्सव का मेला बताती हैं।
कंधे और बोझ वाली मेला शायरी का मतलब क्या है?
ये पंक्तियाँ माता-पिता के त्याग और बच्चों की जिम्मेदारी की बात करती हैं — जो कंधे कभी बच्चे को मेला दिखाने के लिए झुकते थे, वही उम्र के साथ बोझ जैसे लगने लगें तो यह रिश्ते की सबसे दुखद सच्चाई है। इस भाव से जुड़ी और शायरी Bojh Shayari कलेक्शन में पढ़ी जा सकती है।
बुढ़ापे में झुके कंधों को बोझ बताने वाली मेला शायरी क्या कहती है?
"क्यूं बोझ हो जाते है वो झुके हुए कंधे साहब, जिन पर चढ़कर तुम कभी मेला देखा करते थे।" पंक्तियां उन्हीं कंधों के बुढ़ापे में बोझ बन जाने की टीस बयां करती हैं। इसी भाव से जुड़ी Bojh शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
मेला पर हिंदी में शायरी कहां पढ़ें?
आप इस पेज पर मेले से जुड़ी भावुक और उत्सव दोनों तरह की पंक्तियाँ पढ़ सकते हैं। मन को छूने वाली और रचनाएं Man Shayari या Hindi Shayari कलेक्शन में भी मिल जाएंगी।

Ek sher yahan baap ke kandhe par baithkar mela dekhne wale bete ko us kandhe ka karz chukane ki yaad dilata hai. Aage Beta aur Bojh shayari bhi padhein.