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Chingaari Shayari

Kabhi azadi ki jwala, kabhi raakh mein dabi chingaari - dono mein josh chhupa hai.

Chingaari shayari mein azadi ke jazbe se sulagti chingari aur kurbaani ke jazbe ka josh bhara zikr hai. Isi jazbe mein Azadi shayari bhi padhein.

Chingaari Shayari - Azadi Aur Ishq Ki Jwala Ke Sher
चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं

चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं,
इन्कलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं,
मौत जहाँ जन्नत हो ये बात मेरे वतन में हैं,
कुर्बानी का जज्बा जिन्दा मेरे कफन में हैं.

Chingari aajaadee kee sulagee mere jashn mein hain,
Inkalaab kee jvaalaen lipatee mere badan mein hain !!
Maut jahaan jannat ho ye baat mere watan mein hain,
Kurbani ka jajba jinda mere kaphan mein hain !!

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जाने क्या ढूँढती रहती ये आँखे उसमें,
राख के ढ़ेर में शोला हैं ना चिंगारी हैं

Jaane kya dhoondhatee rahatee ye aankhe usamen,
Raakh ke dher mein shola hain na chingaaree hain

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Frequently Asked Questions

आज़ादी की चिंगारी वाली शायरी में देशभक्ति का क्या भाव है?
एक जोशीली शायरी कहती है, "चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं, इन्कलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं, मौत जहाँ जन्नत हो ये बात मेरे वतन में हैं, कुर्बानी का जज्बा जिन्दा मेरे कफन में हैं।" यह आज़ादी के लिए बलिदान देने के जज़्बे और वतन के प्रति प्रेम को बड़ी शिद्दत से बयां करती है, Azadi जैसी देशभक्ति की भावना के करीब।
'राख में चिंगारी' वाली शायरी में आँखों का क्या ज़िक्र है?
एक शेर में लिखा है, "जाने क्या ढूँढती रहती ये आँखे उसमें, राख के ढ़ेर में शोला हैं ना चिंगारी हैं।" यहाँ किसी की आँखों में अब वो पुरानी चमक या जज़्बा ढूंढने की कोशिश की बात है, जो अब राख जैसे बुझे हुए एहसास में बाकी नहीं रहा - Aankh से जुड़ा एक गहरा भाव।
चिंगारी शायरी में देशभक्ति और भावनात्मक दर्द दोनों मिलते हैं?
हाँ, इस विषय की शायरी दो अलग रंग दिखाती है - एक तरफ आज़ादी और कुर्बानी की जोशीली भावना, दूसरी तरफ खोए हुए जज़्बे या रिश्ते का दर्द, जो Dil की गहराई से जुड़ा है।

Ek sher yahan raakh ke dher mein kho gayi chingaari ko dhoondhti aankhon ka gehra dard bayan karta hai. Aage Dil aur Aankh shayari bhi padhein.