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Charitr Shayari

Aaina chehra nahi, kabhi kabhi charitr dikhata hai.

Charitr shayari mein mahaan logon ki mahaanta sadiyon tak yaad rehti hai, kyunki achhe charitr ka nirmaan aksar thokar khaane ke baad hi hota hai. Isi soch mein Bharosa shayari bhi padhein.

महान लोगो की महानता सदियों तक याद होता है,
अच्छे चरित्र का निर्माण ठोकर खाने के बाद होता है.

Mahaan logo kee mahaanata sadiyon tak yaad hota hai,
Achchhe charitr ka nirmaan thokar khaane ke baad hota hai.

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दुनिया में बहुत से लोग आईना देख कर डर जाते,
अगर.. आईने में चेहरा नहीं चरित्र दिखाई देता।

Duniya mein bahut se log aaeena dekh kar dar jaate,
Agar.. aaeene mein chehara nahin charitr dikhaee deta.

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लोग आईना कभी भी ना देखते अगर;
आईने में चित्र की जगह चरित्र दिखाई देता....

Log aaeena kabhee bhee na dekhate agar;
Aaeene mein chitr kee jagah charitr dikhaee deta....

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मैं दोहरे चरित्र में जी नहीं पाती हूँ
इसलिए ही अक्सर अकेली नज़र आती हूँ...!!

Main dohare charitr mein jee nahin paatee hoon
Isalie hee aksar akelee nazar aatee hoon...!!

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Bharosa Shayari

गुत्थियों की तरह उलझा चरित्र लेकर ...
कैसे उम्मीद करूँ कि मुझको कोई समझ जाये.!!

Gutthiyon kee tarah ulajha charitr lekar ...
Kaise ummeed karoon ki mujhako koee samajh jaaye.!!

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Frequently Asked Questions

महान लोगों की महानता सदियों तक याद रहने और अच्छे चरित्र का निर्माण ठोकर खाने के बाद होने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"महान लोगो की महानता सदियों तक याद होता है, अच्छे चरित्र का निर्माण ठोकर खाने के बाद होता है." — यह शायरी कहती है कि महान लोगों की महानता सदियों तक याद रहती है, और अच्छे चरित्र का निर्माण ठोकर खाने के बाद ही होता है।
आईने में चेहरा नहीं बल्कि चरित्र दिखने से डर जाने वाले लोगों की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"दुनिया में बहुत से लोग आईना देख कर डर जाते, अगर.. आईने में चेहरा नहीं चरित्र दिखाई देता।" — यह शायरी कहती है कि दुनिया में बहुत से लोग आईना देखकर इसलिए डर जाते अगर आईने में चेहरा नहीं बल्कि उनका चरित्र दिखाई देता।
आईने में चित्र की जगह चरित्र दिखने पर लोगों के आईना न देखने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"लोग आईना कभी भी ना देखते अगर; आईने में चित्र की जगह चरित्र दिखाई देता...." — यह शायरी कहती है कि लोग आईना कभी न देखते अगर आईने में चित्र की जगह उनका चरित्र दिखाई देता।
दोहरे चरित्र में न जी पाने के कारण अक्सर अकेली नज़र आने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"मैं दोहरे चरित्र में जी नहीं पाती हूँ इसलिए ही अक्सर अकेली नज़र आती हूँ...!!" — यह शायरी एक ऐसी शख़्सियत की बात करती है जो दोहरे चरित्र में जी नहीं पाती, इसीलिए अक्सर अकेली नज़र आती है।
Charitr से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Bharosa, Dar, Gyaan और Haar शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan kehta hai ki bahut se log aaina dekh kar isliye darte hain kyunki usme chehra nahi charitr dikhta hai, to doosra dohre charitr mein na ji paane ki wajah se akela reh jaana kabool karta hai. Aage Anmol Vachan aur Dar shayari bhi padhein.