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Marzi Shayari

Apni marzi se safar kahan, hawa jidhar le jaaye udhar hum hain.

Marzi shayari mein apni marzi se safar na hone aur hawaon ke rukh ke saath chalne ki majboori ka zikr hai. Isi soch mein Apne shayari bhi padhein.

अपनी मर्जी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

Apanee marjee se kahaan apane safar ke ham hain
Rukh havaon ka jidhar ka hai udhar ke ham hain

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DP में तिरंगा लगाने से बेहतर होगा...
कि पूरे साल जहाँ मर्जी नहीं थूके और ना ही मूतें..

Dp mein tiranga lagaane se behatar hoga...
Ki poore saal jahaan marjee nahin thooke aur na hee mooten..

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Frequently Asked Questions

"अपनी मर्जी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं" पंक्ति ज़िंदगी के किस सच को दिखाती है?
"अपनी मर्जी से कहाँ Apne सफ़र के हम हैं, रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं" पंक्ति यह बताती है कि ज़िंदगी की दिशा हमेशा अपनी मर्जी से तय नहीं होती — कई बार हालात की हवा जिस ओर बहाती है, राह वहीं मुड़ जाती है।
DP में तिरंगा लगाने वाली व्यंग्यात्मक शायरी असल में क्या संदेश देती है?
"DP में तिरंगा लगाने से बेहतर होगा... कि पूरे साल जहाँ मर्जी नहीं थूके और ना ही मूतें" पंक्ति एक तीखा Funny है जो दिखावटी देशभक्ति पर चोट करती है — असली देशभक्ति सोशल मीडिया की तस्वीर में नहीं, बल्कि सार्वजनिक जगहों की सफाई जैसी छोटी पर ज़रूरी ज़िम्मेदारियां निभाने में है।
मर्जी शायरी में छोटे-छोटे व्यंग्य से बड़ी बात कहने का अंदाज़ क्या दिखाता है?
चाहे हवाओं के रुख पर चलने की मजबूरी हो या दिखावटी देशभक्ति पर तंज़ — यह Choti Hindi शायरी बड़ी बात कम शब्दों में कह जाने के अपने खास अंदाज़ के लिए जानी जाती है।

Ek sher yahan saal bhar apni marzi se saaf-safai ka khayal rakhna hi sachchi zimmedari bataata hai, DP par tirange se behtar. Aage Ham aur Funny shayari bhi padhein.