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Kalakar Shayari

Duniya mein har roz kirdaar badalte kalakaron par ek gehra khayal.

Kalakar shayari mein kaha gaya hai ki yahan har koi kalakar hai, aur rozana apna kirdaar badalte hue dekha ja sakta hai, duniya ki asliyat par ek soch bhara sher. Isi khayal mein Badal shayari bhi padhein.

हर कोई कलाकार है यहा...
मैं देखता हूँ रोजाना सब किरदार बदलते हुए...

Har koee kalaakaar hai yaha...
Main dekhata hoon rojaana sab kiradaar badalate hue...

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Frequently Asked Questions

'हर कोई कलाकार है यहा' शायरी का क्या मतलब है?
यह पंक्ति जिंदगी को एक रंगमंच की तरह देखती है, जहाँ हर इंसान किसी न किसी किरदार में जी रहा है- 'हर कोई कलाकार है यहा... मैं देखता हूँ रोजाना सब किरदार बदलते हुए' में यही सच्चाई झलकती है। यह दिखाती है कि असली चेहरा और दिखावटी किरदार अक्सर अलग-अलग होते हैं।
लोगों के किरदार बदलते देखने वाली इस शायरी का भाव क्यों खास है?
शायर हर रोज लोगों को अपने हालात और जरूरत के हिसाब से नया रूप, नया किरदार अपनाते देखता है, जो इंसानी फितरत पर एक हल्का सा तंज है। यह छोटी सी 2 Line शायरी है जो Kala शायरी की तरह गहरी बात कम शब्दों में कह जाती है।

Yeh sher insaan ke badalte roop aur duniyadari ke khel ko baarikee se pesh karta hai. Aage 2 Line aur Jaan shayari bhi padhein.