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Gunehgar Shayari

Kabhi bekasoor hi sabse zyada sharminda hote hain.

Gunehgar shayari mein khud ko gunehgar saabit karne ki koshish se lekar dosti bachaye rakhne ki sharton tak, dil ki uljhan saaf dikhti hai. Isi uljhan mein Dhoka shayari bhi padhein.

Gunehgar Shayari - Ilzaam Aur Sacchai Ke Sher
तू मुझे गुनहगार साबित करने की ज़हमत ना उठा

तू मुझे गुनहगार साबित करने की ज़हमत ना उठा...
बस ये बता क्या-क्या कुबूल करना है, जिससे दोस्ती बनी रहे...!!

Too mujhe gunahagaar saabit karane kee zahamat na utha...
Bas ye bata kya-kya kubool karana hai, jisase dostee banee rahe...!!

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जो कुछ भी हूं, पर यार, गुनहगार नहीं हूं,
दहलीज हूं, दरवाजा हूं, पर मैं दीवार नहीं हूं।

Jo kuchh bhee hoon, par yaar, gunahagaar nahin hoon,
Dahaleej hoon, daravaaja hoon, par main deevaar nahin hoon.

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कैसे मिलेंगे हमें चाहने वाले बताइये,
दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह,
वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए,
सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह।

Kaise milenge hamen chaahane vaale bataiye,
Duniya khadee hai raah mein deevaar kee tarah,
Vo bevafaee karake bhee sharminda na hue,
Sajaen milee hamen gunahagaar kee tarah.

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जब गुनाहगार को बख्श दीया उसने..
तो बेगुनाह भी चिल्ला उठे हम भी गुनहगार है....

Jab gunaahagaar ko bakhsh deeya usane..
To begunaah bhee chilla uthe ham bhee gunahagaar hai....

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Bewafa Shayari

गुनहगारों की आँखों में झूठे ग़ुरूर होते हैं...
यहाँ शर्मिन्दा तो सिर्फ़ बेक़सूर होते हैं...!!

Gunahagaaron kee aankhon mein jhoothe guroor hote hain...
Yahaan sharminda to sirf beqasoor hote hain...!!

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Frequently Asked Questions

गुनहगार शायरी में किस तरह के दर्द को बयां किया जाता है?
गुनहगार शायरी में अक्सर खुद को बेकसूर साबित करने की कोशिश, किसी की बेवफाई के बावजूद खुद पर लगे इल्जाम का दर्द, और रिश्तों में इंसाफ न मिलने की तकलीफ बयां होती है।
खुद को गुनहगार ना मानने वाली शायरी में क्या भाव है?
'जो कुछ भी हूं, पर यार, गुनहगार नहीं हूं, दहलीज हूं, दरवाजा हूं, पर मैं दीवार नहीं हूं' पंक्ति में खुद की पहचान को साफ-साफ परिभाषित करते हुए किसी भी तरह का इल्जाम कबूल न करने का दृढ़ भाव दिखाया गया है।
बेवफाई करने वाले के बजाय खुद को गुनहगार पाने वाली शायरी क्या कहती है?
'वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए, सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह' पंक्ति उस अन्याय को उजागर करती है जहां धोखा देने वाला बेदाग बच जाता है और असली तकलीफ सहने वाले को ही सजा भुगतनी पड़ती है।
गुनहगार को माफ करने पर बेगुनाह के गुनहगार बनने वाली शायरी में क्या विडंबना है?
'जब गुनाहगार को बख्श दीया उसने.. तो बेगुनाह भी चिल्ला उठे हम भी गुनहगार है' पंक्ति एक चुटीली विडंबना दिखाती है, जहां माफी मिलने की चाह में बेगुनाह लोग भी खुद को गुनहगार बताने लगते हैं।
गुनहगार शायरी किन रिश्तों के संदर्भ में सबसे ज्यादा लिखी जाती है?
गुनहगार शायरी सबसे ज्यादा प्यार और दोस्ती के रिश्तों के संदर्भ में लिखी जाती है, जहां गलतफहमी, इल्जाम या बेवफाई की वजह से किसी बेकसूर को मुजरिम जैसा महसूस कराया जाता है।

Ek sher yahan yeh bhi kehta hai ki bewafai karne wale kabhi sharminda nahi hote, saza hamesha bekasooron ke hisse aati hai. Aage Bewafa aur Galati shayari bhi padhein.