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Parakram Diwas Shayari

Tribute couplets for Netaji's courage and sacrifice.

These Parakram Diwas shayari couplets remember Netaji Subhas Chandra Bose, whose defiance defined the word parakram itself. Explore more patriotic verses in our Desh Bhakti collection.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने त्याग दी
जीवन की हर अभिलाषा,
अंतिम सांस तक देश की सेवा की
और पराक्रम की दी परिभाषा.

Netaji subhaash chandra boss ne tyaag dee
Jeevan kee har abhilaasha,
Antim saans tak desh kee seva kee
Aur paraakram kee dee paribhaasha.

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का तेवर बड़ा आक्रामक था,
तभी तो अंग्रेजी हुकूमत डरती थी उनमें इतना पराक्रम था !!

Netaji subhash chandra boss ka tevar bada aakraamak tha,
Tabhi to angrez hukoomat daratee thee unamen itana paraakram tha !!

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Frequently Asked Questions

पराक्रम दिवस क्या है?
पराक्रम दिवस भारत सरकार द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (23 जनवरी) को "पराक्रम" यानी साहस और वीरता के दिन के रूप में मनाने के लिए दिया गया आधिकारिक नाम है। यह घोषणा 2021 में की गई थी।
पराक्रम दिवस शायरी में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को किस रूप में दर्शाया गया है?
उन्हें एक निडर योद्धा और साहस की मूर्ति के रूप में दर्शाया गया है, जिनके पराक्रम और अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने के अंदाज़ पर यह पेज खासतौर पर केंद्रित है - उनके संपूर्ण जीवन-वृत्तांत के बजाय।
पराक्रम दिवस हर साल कब मनाया जाता है?
यह एक निश्चित तारीख पर आधारित दिवस है और हर वर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है; अगला अवसर 23 जनवरी 2027 को है।
नेताजी के आक्रामक तेवर पर कौन सी पंक्ति है?
"नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का तेवर बड़ा आक्रामक था, तभी तो अंग्रेजी हुकूमत डरती थी उनमें इतना पराक्रम था!!" जैसी पंक्ति उनके निडर और दबंग व्यक्तित्व को दर्शाती है, जिसके आगे अंग्रेजी हुकूमत भी सहमी रहती थी।
पराक्रम दिवस की शुरुआत क्यों की गई?
भारत सरकार ने नेताजी के अदम्य साहस, आत्म-बलिदान और देशभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से 2021 में उनकी जयंती को "पराक्रम दिवस" के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
यह शायरी किस मौके पर साझा की जा सकती है?
यह शायरी 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के अवसर पर स्कूल कार्यक्रमों, सोशल मीडिया पोस्ट और देशभक्ति से जुड़े आयोजनों में साझा करने के लिए उपयुक्त है।
पराक्रम दिवस और सुभाष चंद्र बोस जयंती में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तारीख - 23 जनवरी - पर मनाए जाते हैं और नेताजी को ही समर्पित हैं, लेकिन इनका दृष्टिकोण अलग है। सुभाष चंद्र बोस जयंती उनके संपूर्ण जीवन और विचारों को स्मरण करती है, जबकि पराक्रम दिवस विशेष रूप से उनके साहस और पराक्रम के गुण को केंद्र में रखकर मनाया जाता है।
क्या इससे मिलती-जुलती देशभक्ति शायरी अन्य विषयों पर भी है?
हाँ, देश भक्ति शायरी और भारत शायरी में भी इसी तरह का जोश और गर्व भरा अंदाज़ मिलता है, जो नेताजी जैसे वीरों की भावना से मेल खाता है।
"पराक्रम" शब्द का इस दिन के संदर्भ में क्या अर्थ है?
"पराक्रम" का अर्थ है साहस, वीरता और अदम्य शक्ति। यह शब्द नेताजी के उस स्वभाव को दर्शाता है जिसने उन्हें अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निडर होकर खड़ा होने और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" जैसा नारा देने की प्रेरणा दी।
पराक्रम दिवस कैसे मनाया जाता है?
स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में साहस और वीरता पर आधारित निबंध प्रतियोगिताएँ, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेने पर बल दिया जाता है।
क्या इस दिन के लिए शायरी भी उपलब्ध है?
हाँ, नेताजी के साहस और पराक्रम को समर्पित शायरी यहाँ उपलब्ध है, जिसे आप देशभक्ति की भावना के साथ साझा कर सकते हैं।
पराक्रम दिवस आज की पीढ़ी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दिन युवाओं को यह सिखाता है कि साहस और आत्म-बलिदान किसी भी विपरीत परिस्थिति से लड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है - एक ऐसा मूल्य जो नेताजी के जीवन से आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था।

Written in the same fearless tone Netaji is remembered for, these lines honor courage over comfort. For more, see our Bhaarat shayari collection.