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Shaheed Diwas Shayari

Verses that salute the martyrs' sacrifice

These Shaheed Diwas shayari couplets carry the same lahoo-and-tiranga imagery found in tributes to India's martyrs, built for a moment of silent salute. For lines honouring soldiers more broadly, see Army shayari.

जिनकी कुर्बानियों से हम जीवित हैं
याद हमेशा वे हमें आएंगे,
न कभी हम भूल पाएंगे

Jinki kurbaaniyon se ham jeevit hain..
Yaad hamesha ve hamen aaenge,
Na kabhee ham bhool paenge !!

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तिरंगा भी सोचता होगा फहराया कम...
और लपेटा ज्यादा जाता हूँ...!!

Tiranga bhee sochata hoga phaharaaya kam...
Aur lapeta jyaada jaata hoon !!

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बस ये बात हवाओं को बताये रखना,
रौशनी होगी चिरागों को जलाए रखना,
लहू देकर भी जिसकी हिफाजत की शहीदों ने,
उस तिरंगे को सदा दिल में बसायें रखना.

Bas ye baat hawao ko bataye rakhna,
Roshni hogi chirago ko jalae rakhana !!
Lahoo dekar bhee jisakee hiphaajat kee shaheedon ne,
Us tirange ko sada dil mein basaayen rakhana !!

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मन को खुद ही मगन कर लो,
कभी-कभी शहीदों को भी नमन कर लो.

Man ko khud hee magan kar lo,
Kabhee-kabhee shaheedon ko bhee naman kar lo !!

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Frequently Asked Questions

शहीद दिवस पर शायरी को श्रद्धांजलि के रूप में क्यों देखा जाता है, उत्सव के रूप में नहीं?
23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी, इसलिए इस दिन की शायरी सम्मान और स्मरण के भाव में लिखी जाती है, न कि खुशी मनाने के लिए, जैसे "जिनकी कुर्बानियों से हम जीवित हैं याद हमेशा वे हमें आएंगे, न कभी हम भूल पाएंगे।"
23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में क्यों याद किया जाता है?
23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी थी। यह दिन इन तीनों युवा क्रांतिकारियों के बलिदान और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान की स्मृति में पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
तिरंगे से जुड़ी शायरी में क्या भाव व्यक्त होता है?
"तिरंगा भी सोचता होगा फहराया कम... और लपेटा ज्यादा जाता हूँ...!!" जैसी पंक्ति तिरंगे के दोहरे प्रतीक, गर्व और बलिदान दोनों, की ओर इशारा करती है, जबकि "बस ये बात हवाओं को बताये रखना, रौशनी होगी चिरागों को जलाए रखना, लहू देकर भी जिसकी हिफाजत की शहीदों ने, उस तिरंगे को सदा दिल में बसायें रखना" शहीदों के त्याग को सीधे तिरंगे से जोड़ती है।
इन तीनों को फांसी की सज़ा किस कारण दी गई थी?
लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज से उनकी मृत्यु के बाद इन क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर बदला लिया था, और केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने की घटना में भी भगत सिंह की भूमिका सामने आई थी। इन्हीं कृत्यों के आधार पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई।
छोटी पंक्तियां इस पेज पर कैसे इस्तेमाल की जा सकती हैं?
"मन को खुद ही मगन कर लो, कभी-कभी शहीदों को भी नमन कर लो" जैसी छोटी पंक्ति सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त श्रद्धांजलि के रूप में साझा की जा सकती है, बिना किसी उत्सव के भाव के।
इस दिन देशभर में श्रद्धांजलि किस तरह दी जाती है?
स्मारकों पर — विशेष रूप से हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर, जहां तीनों का अंतिम संस्कार हुआ था — पुष्पांजलि अर्पित की जाती है, दो मिनट का मौन रखा जाता है, और स्कूल-कॉलेजों में भाषण व निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं।
क्या इसी विषय पर कोट्स या सेना को समर्पित शायरी भी मिलेगी?
हां, अंग्रेज़ी/हिंदी उद्धरणों के लिए Quotes देखें, और देश की सेना को समर्पित शायरी के लिए Army पर जाएं।
क्या भारत में एक से अधिक शहीद दिवस मनाए जाते हैं?
हां। 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के रूप में भी शहीद दिवस मनाया जाता है, जबकि 23 मार्च भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को समर्पित है — इसलिए तारीख के आधार पर संदर्भ स्पष्ट रखना ज़रूरी है।
क्या इस अवसर से जुड़ी कोई विशेष सामाजिक परंपरा है?
इस दिन कोई उत्सवधर्मी रस्म नहीं होती, बल्कि यह विशुद्ध रूप से स्मरण और सम्मान का दिन है। लोग सोशल मीडिया पर उनके विचारों से जुड़े संदेश साझा करते हैं, जैसे शहीद दिवस के विचार और श्रद्धांजलिस्वरूप संदेश

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