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Durga Ashtami Shayari

Maa ke charno mein, shabd bhi shayari ban jaate hain.

Durga Ashtami shayari carries the devotion of Navratri nights - verses about singing Maa's praise and welcoming the devi into your home. Add a line from Wishes to round off your greeting.

देवी के कदम आपके घर में आएं
आप खुशहाली से नहाएं
परेशानिया आपसे आँखे चुराएं
नवरात्रि की आपको शुभ कामनाएं

Devee ke kadam aapake ghar mein aaen
Aap khushahaalee se nahaen
Pareshaaniya aapase aankhe churaen
Navaraatri kee aapako shubh kaamanaen

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सारी रात माँ के गुण गायें
माँ का ही नाम जपें
माँ में ही खो जाएँ !! शुभ नवरात्रि !!

Saaree raat maan ke gun gaayen
Maan ka hee naam japen
Maan mein hee kho jaen !! shubh navaraatri !!

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पग पग में फूल खिले
ख़ुशी आप सबको इतनी मिले
कभी न हो दुखों का सामना
यही है नवरात्रि की शुभकामना

Pag pag mein phool khile
Khushee aap sabako itanee mile
Kabhee na ho dukhon ka saamana
Yahee hai navaraatri kee shubhakaamana

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Frequently Asked Questions

दुर्गा अष्टमी की शायरी में मां दुर्गा की भक्ति किस तरह झलकती है?
इस शायरी में भक्ति और समर्पण का भाव गहराई से उभरता है, जैसे "सारी रात माँ के गुण गायें, माँ का ही नाम जपें, माँ में ही खो जाएँ" - यह पंक्तियां रातभर जागरण और माता के नाम-स्मरण की परंपरा को खूबसूरती से बयां करती हैं।
दुर्गा अष्टमी क्या है और नवरात्रि में इसका क्या स्थान है?
दुर्गा अष्टमी शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन मनाई जाने वाली पूजा है, जिसे महा अष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप की आराधना की जाती है, और इसे नवरात्रि के नौ दिनों में सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है। भक्त इस दिन विशेष रूप से व्रत, पूजा-पाठ और हवन के माध्यम से मां दुर्गा से आशीर्वाद मांगते हैं।
दुर्गा अष्टमी शायरी में शुभकामनाओं का अंदाज क्यों खास होता है?
यहां शुभकामनाएं सिर्फ रस्मी नहीं बल्कि दिल से निकली दुआओं जैसी लगती हैं, जैसे "पग पग में फूल खिले, ख़ुशी आप सबको इतनी मिले, कभी न हो दुखों का सामना" - जहां हर पंक्ति सुख और सुरक्षा की कामना करती है। यही आत्मीय भाव इसे परिवार और दोस्तों को भेजने के लिए खास बनाता है।
महा अष्टमी पूजा में क्या-क्या किया जाता है?
महा अष्टमी पूजा में देवी की विशेष आरती, षोडशोपचार पूजन (सोलह चरणों वाली विधि), और अखंड ज्योति की देखभाल शामिल होती है। कई घरों और मंदिरों में इस दिन हवन भी किया जाता है, जिसमें नौ दिनों की पूजा का समापन आहुति के साथ किया जाता है। शक्ति की आराधना का यह क्षण भक्तों के लिए वर्ष की सबसे पवित्र घड़ियों में से एक माना जाता है।
दुर्गा अष्टमी शायरी में देवी के आगमन का जिक्र किस तरह किया जाता है?
"देवी के कदम आपके घर में आएं, आप खुशहाली से नहाएं" जैसी पंक्तियां देवी के घर में स्वागत और उनकी कृपा से घर में सुख-समृद्धि आने की भावना को दर्शाती हैं। यह भाव खासकर उन लोगों को पसंद आता है जो इस दिन को घर में देवी के आशीर्वाद के आगमन के रूप में देखते हैं।
कन्या पूजन क्या है और यह अष्टमी के दिन क्यों किया जाता है?
कन्या पूजन में छोटी उम्र की कन्याओं को देवी का साक्षात रूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन (आमतौर पर पूरी, हलवा और चना) कराया जाता है और उपहार व दक्षिणा दी जाती है। मान्यता है कि रजस्वला होने से पहले की कन्याओं में देवी की शक्ति सबसे शुद्ध रूप में विद्यमान होती है, इसलिए अष्टमी या नवमी के दिन इस परंपरा को निभाना विशेष फलदायी माना जाता है। यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान की भी एक सुंदर मिसाल है।
दुर्गा अष्टमी की शायरी किसे भेजनी चाहिए और और कहां मिल सकती है?
यह भक्ति भरी शायरी परिवार, दोस्तों और खासकर बड़े-बुजुर्गों को भेजने के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसमें देवी की कृपा और शुभकामनाओं का भाव प्रमुख रहता है। अगर आप मां अंबे से जुड़ी और शायरी तलाश रहे हैं, तो हमारा अंबे शायरी संग्रह भी देख सकते हैं, या शुभकामना संदेश से और विकल्प चुन सकते हैं।
संधि पूजा क्या होती है?
संधि पूजा अष्टमी तिथि की अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के पहले 24 मिनट को मिलाकर बनने वाले 48 मिनट के दुर्लभ काल में की जाती है। मान्यता है कि इसी क्षण में देवी दुर्गा ने चंड-मुंड राक्षसों का वध किया था, इसलिए इसे अत्यंत शक्तिशाली और शुभ समय माना जाता है। बंगाल और पूर्वी भारत में इस पूजा का विशेष महत्व है, जहां इसे बड़े विधि-विधान से संपन्न किया जाता है।
दुर्गा अष्टमी के दिन देवी के किस स्वरूप की पूजा होती है?
नवरात्रि के आठवें दिन देवी के महागौरी स्वरूप की पूजा करने की परंपरा प्रचलित है, जो शांति, करुणा और शुद्धता की प्रतीक मानी जाती हैं। कई क्षेत्रों में इसी दिन को महिषासुरमर्दिनी स्वरूप की पूजा से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि यह उनके शक्ति-प्रदर्शन का दिन माना जाता है। स्वरूप चाहे जो भी हो, भाव हमेशा शक्ति और साहस की आराधना का ही रहता है।
दुर्गा अष्टमी 2026 में किस तारीख को है?
दुर्गा अष्टमी हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, इसलिए इसकी तारीख हर वर्ष चंद्र पंचांग के अनुसार बदलती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 अक्टूबर को पड़ रही है। अगर आप यह प्रश्न किसी और साल में पढ़ रहे हैं, तो सटीक तारीख के लिए उस वर्ष का पंचांग देखना ही सबसे भरोसेमंद तरीका है।
क्या दुर्गा अष्टमी और महा नवमी अलग-अलग हैं?
हां, अष्टमी और नवमी नवरात्रि के दो अलग-अलग दिन हैं, हालांकि दोनों आपस में गहराई से जुड़े हैं - खासकर संधि पूजा के माध्यम से, जो दोनों तिथियों को जोड़ती है। अष्टमी को कन्या पूजन और महागौरी की आराधना पर जोर रहता है, जबकि नवमी नवरात्रि के समापन और हवन का दिन होता है। कई परिवार अपनी पारिवारिक या क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार इनमें से किसी एक दिन कन्या पूजन करना पसंद करते हैं।
क्या दुर्गा अष्टमी पर व्रत रखा जाता है?
बहुत से भक्त पूरे नवरात्रि में व्रत रखते हैं, लेकिन जो लोग केवल एक दिन का व्रत रखना चाहते हैं, उनके लिए अष्टमी को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन के व्रत में फलाहार या सात्विक भोजन लिया जाता है, और शाम को कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा कई घरों में प्रचलित है।
दुर्गा अष्टमी और अन्य नवरात्रि पर्वों में क्या समानता है?
दुर्गा अष्टमी की भावना अन्य नवरात्रि पर्वों जैसी ही है - बुराई पर अच्छाई की जीत और नारी शक्ति का सम्मान। इस दिन साझा किए जाने वाले संदेशों और स्टेटस में भी अक्सर यही भाव झलकता है, जहां लोग मां दुर्गा से शक्ति और साहस की कामना करते हैं।
दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं और शायरी कहां से भेजी जा सकती हैं?
अगर आप इस पावन अवसर पर अपनों को खास संदेश भेजना चाहते हैं, तो शुभकामनाएं, शायरी और कोट्स के हमारे संग्रह से भावभीने शब्द चुन सकते हैं, जो भक्ति और उत्सव दोनों के रंग में रंगे हैं।

These couplets suit temple gatherings, family messages, or a quiet morning prayer. For more Devi-devotion verses, see Ambe shayari.