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Surdas Jayanti Quotes

Verses of Krishna bhakti from the blind saint-poet Surdas.

Surdas Jayanti quotes here draw on his bhajans in praise of Hari, written by a poet whose blindness never dimmed his devotion. See our Shayari picks for a more poetic take.

चरन कमल बंदौ हरि राई

चरन कमल बंदौ हरि राई।
जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, आंधर कों सब कछु दरसाई॥
बहिरो सुनै, मूक पुनि बोलै, रंक चले सिर छत्र धराई।
सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बंदौं तेहि पाई॥

हरि की महिमा गान करने वाले संत महाकवि...

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Frequently Asked Questions

सूरदास जयंती के कोट्स में सूरदास जी की कौन-सी प्रसिद्ध रचना उद्धृत की जाती है?
इस अवसर पर सूरदास जी का प्रसिद्ध पद कोट के रूप में साझा किया जाता है — "चरन कमल बंदौ हरि राई। जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, आंधर कों सब कछु दरसाई॥ बहिरो सुनै, मूक पुनि बोलै, रंक चले सिर छत्र धराई। सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बंदौं तेहि पाई॥" यह हरि के चरणों की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय पद है।
सूरदास जयंती किस दिन मनाई जाती है और संत सूरदास कौन थे?
सूरदास जयंती हिन्दू पंचांग की एक तिथि-आधारित परंपरा के अनुसार मनाई जाती है; वर्ष 2027 में यह लगभग 10 मई को पड़ने की संभावना है। सूरदास (लगभग 15वीं-16वीं शताब्दी) हिन्दी साहित्य के महानतम कृष्ण-भक्त कवियों में गिने जाते हैं। कहा जाता है कि वे दृष्टिहीन थे, फिर भी उनकी काव्य-दृष्टि इतनी गहन थी कि उन्होंने कृष्ण की बाल-लीलाओं का जीवंत चित्रण अपनी रचनाओं में किया।
इस पद का भावार्थ क्या है?
इस पद में सूरदास जी कहते हैं कि हरि की कृपा से लंगड़ा व्यक्ति भी पहाड़ लांघ सकता है, अंधे को सब कुछ दिखने लगता है, बहरा सुनने लगता है, गूंगा बोलने लगता है और निर्धन व्यक्ति भी राजा जैसा सम्मान पाता है — यानी हरि-भक्ति में हर असंभव को संभव बना देने की शक्ति है।
सूरदास की प्रमुख साहित्यिक रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
सूरदास की सबसे प्रसिद्ध कृति "सूरसागर" है, जिसमें हजारों पद कृष्ण की लीलाओं, विशेषकर बाल-लीला और वात्सल्य भाव पर केंद्रित हैं। इसके अतिरिक्त "सूरसारावली" और "साहित्य लहरी" भी उनकी उल्लेखनीय रचनाएँ मानी जाती हैं। उनकी भाषा ब्रजभाषा थी, जिसने आगे चलकर हिन्दी काव्य-परंपरा को गहराई से प्रभावित किया।
सूरदास कौन थे और उनकी जयंती क्यों मनाई जाती है?
सूरदास सोलहवीं सदी के एक दृष्टिबाधित संत-कवि थे, जिन्हें कृष्ण-भक्ति काव्यधारा के सबसे बड़े स्तंभों में गिना जाता है और जिनकी रचना 'सूरसागर' आज भी अत्यंत लोकप्रिय है। उनकी जयंती इसी भक्ति-परंपरा को याद करने और उनके पदों को श्रद्धा से गाने के लिए मनाई जाती है। अधिक भक्ति-भाव से भरे पद पढ़ने के लिए आप Shayari संग्रह भी देख सकते हैं।
सूरदास और वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग से क्या संबंध था?
मान्यता है कि सूरदास वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित पुष्टिमार्ग संप्रदाय से जुड़े और उन्हीं की प्रेरणा से कृष्ण-भक्ति काव्य रचना की ओर उन्मुख हुए। इस संप्रदाय में कृष्ण की सेवा और स्मरण को "पुष्टि" यानी ईश्वर की कृपा का मार्ग माना जाता है, और सूरदास की रचनाएँ आज भी पुष्टिमार्गीय हवेली-संगीत परंपरा का अभिन्न अंग हैं।
सूरदास के काव्य में वात्सल्य और भक्ति रस का क्या महत्व है?
सूरदास को वात्सल्य रस के सम्राट कवि के रूप में जाना जाता है - उन्होंने बालक कृष्ण की मासूमियत, माखनचोरी और यशोदा के वात्सल्य को अत्यंत मार्मिक ढंग से शब्दबद्ध किया। उनकी रचनाओं में भक्ति और सौंदर्य का ऐसा संगम है कि पाठक स्वयं को कृष्ण-लीला का साक्षी अनुभव करता है, जिसने भक्ति आंदोलन को व्यापक जनमानस तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
सूरदास जयंती कैसे मनाई जाती है?
इस दिन साहित्यिक संस्थाएँ और मंदिर सूरदास के पदों के गायन, भजन-कीर्तन और कवि-सम्मेलनों का आयोजन करते हैं। ब्रज क्षेत्र में विशेष रूप से हवेली-संगीत शैली में सूरसागर के पद गाए जाते हैं, और विद्यालयों-महाविद्यालयों में उनके साहित्यिक योगदान पर संगोष्ठियाँ आयोजित की जाती हैं।
सूरदास जयंती पर लोग अपनी श्रद्धांजलि और शुभकामनाएँ किस प्रकार व्यक्त करते हैं?
कई लोग इस दिन सूरदास के जीवन और काव्य से प्रेरित सूरदास जयंती कोट्स तथा भक्ति-रस से परिपूर्ण सूरदास जयंती शायरी साझा करते हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर भावपूर्ण सूरदास जयंती स्टेटस और सूरदास जयंती शुभकामनाएं के माध्यम से भी संत कवि को स्मरण करने की परंपरा प्रचलित है।

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