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Raktdaan Shayari

Kisi ko taadapte dekh nahi sakte, isliye rakt daan karte hain.

Raktdaan shayari mein ek jazba hai ki abhimaan nahi bas insaniyat ka kaam karna hai, kisi ko aankhon ke saamne taadapte dekh nahi sakte isliye rakt daan karte hain. Isi jazbe mein Insaan shayari bhi padhein.

Raktdaan Shayari - Insaniyat Ke Sher
मैं खुद पर गर्व नही अभिमान करता हूँ

मैं खुद पर गर्व नही अभिमान करता हूँ
छाती ठोककर इंसानो वाला काम करता हूँ
नही देख सकता आंखो के सामने तड़पता किसी को
सिर्फ और सिर्फ इसीलिए मैं रक्तदान करता हूँ

Main khud par garv nahee abhimaan karata hoon
Chhaatee thokakar insaano vaala kaam karata hoon
Nahee dekh sakata aankho ke saamane tadapata kisee ko
Sirph aur sirph iseelie main raktadaan karata hoon

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Frequently Asked Questions

रक्तदान शायरी का मुख्य संदेश क्या है?
यह शायरी रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा के रूप में दिखाती है — "मैं खुद पर गर्व नही अभिमान करता हूँ, छाती ठोककर इंसानो वाला काम करता हूँ, नही देख सकता आंखो के सामने तड़पता किसी को, सिर्फ और सिर्फ इसीलिए मैं रक्तदान करता हूँ।" यह पंक्तियाँ दिखाती हैं कि किसी की जान बचाना ही सबसे बड़ा Kaam है, और यह एक सच्चा Insaan होने की पहचान है।
"मैं खुद पर गर्व नही अभिमान करता हूँ" पंक्ति में गर्व और अभिमान के बीच क्या फर्क दिखाया गया है?
यह पंक्ति एक सूक्ष्म भाव को उजागर करती है — रक्तदान करने वाला व्यक्ति इसे अहंकार का विषय नहीं, बल्कि गर्व और आत्म-संतोष का कारण मानता है। "छाती ठोककर इंसानो वाला काम करता हूँ" से पता चलता है कि उसकी नज़रों में यह कोई एहसान नहीं, बल्कि हर Khud के भीतर की मानवता को निभाने जैसा फ़र्ज़ है — किसी को तड़पता देख वह चुप नहीं रह पाता, इसीलिए वह रक्तदान करता है।

Ek sher yahan seva aur daya ke bhaav ko bade sammanjanak andaaz mein bayan karta hai. Aage Aankh aur Abhimaan shayari bhi padhein.