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Kudrat Shayari

Kudrat ka dastoor hai badlaav, magar sambhalna zaroori hai.

Kudrat shayari mein purana saal doosron se door hote jaana kudrat ka hi dastoor bataya jaata hai, aur naye saal ko khushi se manzoor karne ki seekh di jaati hai. Isi dastoor mein Dharti shayari bhi padhein.

Kudrat Shayari - Prakriti Aur Vikas Ke Sher

पुराना साल सबसे हो रहा है दूर
क्या करे यही हैं कुदरत का दस्तूर
बीती यादें सोच कर उदास न हो
करो खुशियों के साथ नए साल को मंज़ूर

Purana Saal Sabse Ho Raha Hai Door
Kya Kare Yahi Hain Kudrat Ka Dastoor
Beeti Yaadein Soch Kar Udaas Na Ho
Karo Khushiyo Ke Saath Naye Saal Ko Manzoor

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हमने भी कितने पेड़ तोड़ दिए,
संसद की कुर्सियों में जोड़ दिए,
कुआँ बुझा दिए, नदियाँ सुखा दिए,
विकास की ताकत से कुदरत को झुका दिए.

Hamane bhee kitane ped tod die,
Sansad kee kursiyon mein jod die,
Kuaan bujha die, nadiyaan sukha die,
Vikaas kee taakat se kudarat ko jhuka die.

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ये तो अच्छा हुआ कुदरत ने रंगीन नहीं रखे आँसूं

ये तो अच्छा हुआ कुदरत ने रंगीन नहीं रखे आँसूं,
वरना जिसके दामन में गिरते वो भी बदनाम हो जाता।

Ye to achchha hua kudarat ne rangeen nahin rakhe aansoon,
Varana jisake daaman mein girate vo bhee badanaam ho jaata.

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वो मेहँदी वाले हाथ आपके कातिल थी मुस्कान आपकी
रंग रूप मनभवणो मस्त थी चुड़ले की खनक आपकी

महर कुदरत की आप पर बात छु गई दिल को आपकी
मर गयो छोरो थारे पर हरदम आवै याद आपकी!!!!

Vo mehandee vaale haath aapake kaatil thee muskaan aapakee
Rang roop manabhavano mast thee chudale kee khanak aapakee

Mahar kudarat kee aap par baat chhu gaee dil ko aapakee
Mar gayo chhoro thaare par haradam aavai yaad aapakee!!!!

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Bahaar Shayari

जिस देश का झंडा खूद कुदरत फहराये ,
मजाल हैं दुश्मन भी उस देश का कुछ बिगाड़ पाए...

Jis desh ka jhanda khood kudarat phaharaaye ,
Majaal hain dushman bhee us desh ka kuchh bigaad pae...

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Frequently Asked Questions

नए साल पर कुदरत के दस्तूर की बात करने वाली शायरी क्या कहती है?
एक शायरी कहती है, "पुराना साल सबसे हो रहा है दूर, क्या करे यही हैं कुदरत का दस्तूर, बीती यादें सोच कर उदास न हो, करो खुशियों के साथ नए साल को मंज़ूर।" यह समय के बदलते चक्र को कुदरत का नियम मानते हुए, बीते हुए को भुलाकर आगे बढ़ने का संदेश देती है।
पेड़ों और विकास को लेकर कुदरत पर क्या तंज़ कसा गया है?
एक शेर में पर्यावरण को लेकर चिंता जताई गई है - "हमने भी कितने पेड़ तोड़ दिए, संसद की कुर्सियों में जोड़ दिए, कुआँ बुझा दिए, नदियाँ सुखा दिए, विकास की ताकत से कुदरत को झुका दिए।" यह इंसान द्वारा तथाकथित विकास के नाम पर प्रकृति को नुकसान पहुंचाने पर एक सीधा तंज़ है। प्रकृति से जुड़े और भाव Dharti सेक्शन में भी मिलते हैं।
मेहंदी और कुदरत की महर वाली शायरी में क्या भाव है?
एक लोक-अंदाज़ की शायरी में कहा गया है, "वो मेहँदी वाले हाथ आपके कातिल थी मुस्कान आपकी... महर कुदरत की आप पर बात छु गई दिल को आपकी।" यहाँ किसी की खूबसूरती को कुदरत की खास मेहरबानी बताया गया है, एक रूमानी-लोक अंदाज़ में।
'आँसू रंगीन नहीं होते' वाली शायरी में कुदरत की क्या तारीफ की गई है?
शेर कहता है, "ये तो अच्छा हुआ कुदरत ने रंगीन नहीं रखे आँसूं, वरना जिसके दामन में गिरते वो भी बदनाम हो जाता।" यह कुदरत की उस सूझबूझ की तारीफ करता है जिसने आँसुओं को बेरंग रखकर किसी का राज़ छुपाए रखने में मदद की।
कुदरत से जुड़ी शायरी में किन प्राकृतिक चीज़ों का ज़िक्र आता है?
इस विषय की शायरियों में पेड़, नदी, कुआं जैसी प्रकृति की चीज़ों का ज़िक्र आता है। इसी तरह की भावनाओं से जुड़ी Paani और Surya जैसी शायरी भी इस साइट पर उपलब्ध है।

Ek sher yahan vikas ki takat se kuye aur nadiyan sukhane par seedha sawaal uthata hai, to doosra us desh ko khaas manta hai jiska jhanda kudrat khud fehraye. Aage Bahaar aur Paani shayari bhi padhein.