छज्जे से अटकी थी वो पतंग
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छज्जे से अटकी थी वो पतंग, हल्ला मोहल्ले में था,
एक मांझे की डोर टूटी थी और ये किस्सा बचपन में था।
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छज्जे से अटकी थी वो पतंग, हल्ला मोहल्ले में था,
एक मांझे की डोर टूटी थी और ये किस्सा बचपन में था।
Chhajje se atakee thee vo patang, halla mohalle mein tha,
Ek maanjhe kee dor tootee thee aur ye kissa bachapan mein tha.
