अकसर भुल जाती हूँ मैं तुम्हें शाम की चाय में चीनी की तरह
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अकसर भुल जाती हूँ मैं तुम्हें शाम की चाय में चीनी की तरह,
फिर जिंदगी का फीकापन तुम्हारी कमी का एहसास दिला देता है।
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अकसर भुल जाती हूँ मैं तुम्हें शाम की चाय में चीनी की तरह,
फिर जिंदगी का फीकापन तुम्हारी कमी का एहसास दिला देता है।
Akasar bhul jaatee hoon main tumhen shaam kee chaay mein cheenee kee tarah,
Phir jindagee ka pheekaapan tumhaaree kamee ka ehasaas dila deta hai.
