Logo - Feel The Words

Imarat Shayari

Hausla badhaya to rukavaton ki imarat hil gayi.

Imarat shayari mein ek hausla bhara jazba hai ki musibaton se ghirkar bhi hausla badhaaya to rukavaton ki imarat hil gayi aur door nazar aa rahi manzil mil gayi. Isi jazbe mein Door shayari bhi padhein.

घिर चुका था जब मुसीबतों के बीच
हौसला बढाया तो रुकावटों की ईमारत हिल ही गयी,
बहुत दूर नजर आ रही थी जो इक दिन
कदम बढाया तो आज मंजिल मिल ही गयी।

Ghir chuka tha jab museebaton ke beech
Hausala badhaaya to rukaavaton kee eemaarat hil hee gayee,
Bahut door najar aa rahee thee jo ik din
Kadam badhaaya to aaj manjil mil hee gayee.

Read more...

Frequently Asked Questions

रुकावटों की इमारत हिलने वाली शायरी में क्या हौसला दिया गया है?
एक शायरी में लिखा है, "घिर चुका था जब मुसीबतों के बीच हौसला बढाया तो रुकावटों की ईमारत हिल ही गयी, बहुत दूर नजर आ रही थी जो इक दिन कदम बढाया तो आज मंजिल मिल ही गयी।" यहाँ इमारत मुश्किलों और रुकावटों का प्रतीक है, जो हौसले और मेहनत से टूट जाती है - मंज़िल दूर लगते हुए भी आखिरकार मिल जाती है।
इमारत शायरी में मंज़िल पाने का क्या राज़ बताया गया है?
इस शायरी के मुताबिक मुश्किलों की इमारत को गिराने का राज़ है हौसला बनाए रखना और लगातार कदम बढ़ाते रहना - चाहे मंज़िल कितनी भी दूर Door क्यों न लगे। यही जज़्बा एक दिन असली Victory यानी जीत में बदल जाता है।

Ek sher yahan har mushkil ko ek imarat ki tarah gira dene ka hausla deta hai. Aage Dum aur Nazar shayari bhi padhein.