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Kisht Shayari

Zindagi bhi kisi kisht se kam nahi.

Kisht shayari un lines ki baat karti hai jahan karza sirf paison ka nahi rehta, kisan ki mehnat aur rishton ke hisaab-kitab mein bhi kisht chhupi hoti hai. Isi tarah Jeb shayari bhi padhein.

Kisht Shayari - Karze Ki Kishton Par Dil Ki Baat

कोई परेशान हैं सास-बहू के रिश्तो में,
किसान परेशान हैं कर्ज की किश्तों में

Koee pareshaan hain saas-bahoo ke rishto mein,
Kisaan pareshaan hain karj kee kishton mein

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सुनो, एकदम से जुदाई मुश्किल है,
मेरी मानों कुछ किश्तें तय कर लो..!!

Suno, ekadam se judaee mushkil hai,
Meree maanon kuchh kishten tay kar lo..!!

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रिश्तों पर रुपयों की किश्ते जोड़ देते है,
खाली हो जेब तो लोग हर रिश्तें तोड़ देते है।

Rishton par rupayon kee kishte jod dete hai,
Khaalee ho jeb to log har rishten tod dete hai.

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मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट

मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट
मेरा नादान गाँव अब भी उलझा है कर्ज की किश्तों में

Mere khet kee mittee se palata hai tere shahar ka pet
Mera naadaan gaanv ab bhee ulajha hai karj kee kishton mein

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2 Line Shayari

मत सोच कुछ तू........
सांसे हो या जिंदगी किश्ते अदा हो रही है.....

Mat soch kuchh too........
Saanse ho ya jindagee kishte ada ho rahee hai.....

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उठ रही है वो आँख रुक रुक के
क़त्ल तो मेरा हो रहा किश्तो में

Uth rahee hai vo aankh ruk ruk ke
Qatl to mera ho raha kishto mein

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Frequently Asked Questions

सास-बहू के रिश्तों में उलझे लोगों के साथ किसानों को कर्ज़ की किश्तों में परेशान बताने वाली शायरी कौन सी है?
"कोई परेशान हैं सास-बहू के रिश्तो में, किसान परेशान हैं कर्ज की किश्तों में" — यह शायरी कहती है कि जहां कुछ लोग सास-बहू के रिश्तों में परेशान हैं, वहीं किसान कर्ज़ की किश्तों को लेकर परेशान हैं।
अचानक जुदाई मुश्किल होने पर उसे किश्तों में तय कर लेने की गुज़ारिश करने वाली शायरी कौन सी है?
"सुनो, एकदम से जुदाई मुश्किल है, मेरी मानों कुछ किश्तें तय कर लो..!!" — यह शायरी कहती है कि एकदम से जुदाई मुश्किल है, इसलिए कुछ किश्तों में जुदाई तय कर ली जाए।
जेब खाली होते ही रिश्तों की किश्तें टूटने और लोगों के रिश्ते तोड़ देने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"रिश्तों पर रुपयों की किश्ते जोड़ देते है, खाली हो जेब तो लोग हर रिश्तें तोड़ देते है।" — यह शायरी कहती है कि लोग रिश्तों पर भी रुपयों की किश्तें जोड़ देते हैं, और जेब खाली होते ही रिश्ते तोड़ देते हैं।
गांव की मिट्टी से शहर का पेट पलने के बावजूद गांव के कर्ज़ की किश्तों में उलझे रहने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट मेरा नादान गाँव अब भी उलझा है कर्ज की किश्तों में " — यह शायरी किसान के हक़ में एक मार्मिक बात कहती है — गांव की मिट्टी से शहर का पेट पलता है, फिर भी गांव खुद कर्ज़ की किश्तों में उलझा रह जाता है।
किश्त से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Jeb, Log और ADA शायरी पढ़ सकते हैं।

Kuch sher yahan judaai ko bhi kishton mein tay karne ki baat karte hain, dheere-dheere door hone ka dard. Aur milega Aankh aur 2 Line shayari mein.