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Alarm Shayari

Bachpan ki neend khud khulti thi, ab alarm par tiki hai.

Alarm shayari un lines ki baat karti hai jo bachpan ki neend aur aaj ki zimmedariyon ke beech ka fark dikhati hain, kabhi chudiyon ki khanak yaad aati hai, kabhi alarm band karke phir so jaana hi sabse acha lagta hai. Aur sher Man shayari mein milenge.

अलार्म की जरूरत तो हम नासमझों को पड़ती है,
जिम्मेदार इंसान की रूह काफी है उन्हें वक्त्त पे जगाने के लिए !!

Alarm kee jaroorat to ham naasamajhon ko padatee hai,
Jimmedaar insaan kee rooh kaaphee hai unhen Waqt pe jagaane ke lie !!

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ख़्वाबों में मिलेंगे कहकर, वो हर रोज़ चले जाते हैं
एक हम हैं, जो अलार्म बंद करके फिर सो जाते हैं 😜

Khwabon mein milenge kah kar, wo har roz chale jaate hain
Ek ham hain, jo alaarm band karake phir so jaate hain 😜

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अच्छा नहीं लगता ये, अलार्म को सुनकर उठना,
काश कोई जुल्फो से पानी झटक कर हमे भी जगाता !!

Achchha nahin lagata ye, alarm ko sunakar uthana,
Kaash koee julpho se paanee jhatak kar hame bhee jagaata !!

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मुझे जगाने के लिए, अलार्म नहीं.,
हाथों की चूड़ियां, खनखनाया कर !!

Mujhe jagaane ke lie, alarm nahin.,
Haathon kee choodiyaan, khanakhanaaya kar !!

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Ham Shayari

ख्वाबों की दुनिया से लौटने का मन नहीं करता,
पर उठना पड़ता है, जब जिम्मेदारियों का अलार्म बजता है !!

Khvaabon kee duniya se lautane ka man nahin karata,
Par uthana padata hai, jab jimmedaariyon ka alarm bajta hai !!

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तेरी यादों में इस कदर खो जाते हैं
घड़ी में जागने का नहीं सोने का अलार्म बजाते हैं !!

Teri yaadon mein is kadar kho jaate hain,
Ghadi mein jaagane ka nahin sone ka alarm bajaate hain !!

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जरा सा बड़ा क्या हो गया,
नींद बस घड़ी के अलार्म पर टिक गई !!
जाने कहाँ जाके सिमट गया वो वक्त,
जब नींद भी अपनी चाहत से खुलती थी !!

Jara sa bada kya ho gaya,
Neend bas ghadee ke alarm par tik gaee !!
Jaane kahaan jaake simat gaya vo Waqt,
Jab neend bhee apanee chaahat se khulatee thee !!

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Frequently Asked Questions

अलार्म शायरी में सुबह जल्दी उठने पर क्या व्यंग्य किया गया है?
“अलार्म की जरूरत तो हम नासमझों को पड़ती है, जिम्मेदार इंसान की रूह काफी है उन्हें वक्त्त पे जगाने के लिए !!” पंक्ति हल्के व्यंग्य से कहती है कि सच में ज़िम्मेदार इंसान को जगाने के लिए अलार्म की ज़रूरत ही नहीं पड़ती, उसकी अपनी अंतरात्मा ही काफी है।
अलार्म शायरी में सपनों और हकीकत के बीच का फासला कैसे दिखाया गया है?
“ख़्वाबों में मिलेंगे कहकर, वो हर रोज़ चले जाते हैं एक हम हैं, जो अलार्म बंद करके फिर सो जाते हैं 😜” पंक्ति मज़ाकिया अंदाज़ में Ham की उस आदत को दिखाती है जो ख़्वाबों में खोए रहने के लिए अलार्म बंद कर फिर सो जाते हैं।
अलार्म को लेकर रोमांटिक कल्पनाएँ किस तरह पेश की गई हैं?
“अच्छा नहीं लगता ये, अलार्म को सुनकर उठना, काश कोई जुल्फो से पानी झटक कर हमे भी जगाता !!” पंक्ति में अलार्म की कर्कश आवाज़ की जगह किसी अपने के प्यारे अंदाज़ में जगाए जाने की चाहत जताई गई है, जो शायरी में एक रोमांटिक मोड़ लाती है।
क्या अलार्म शायरी में जगाने के और भी प्यारे तरीके सुझाए गए हैं?
हाँ, “मुझे जगाने के लिए, अलार्म नहीं., हाथों की चूड़ियां, खनखनाया कर !!” पंक्ति में चूड़ियों की खनक जैसी मीठी आवाज़ को अलार्म से बेहतर बताया गया है - यह भाव किसी Man की भीतरी चाहत को बड़ी नज़ाकत से बयां करता है।
अलार्म शायरी और कहाँ पढ़ी जा सकती है?
अगर आपको सुबह और नींद से जुड़ी हल्की-फुल्की व रोमांटिक पंक्तियाँ पसंद आईं, तो हमारे Quotes सेक्शन में इसी विषय के और उद्धरण भी पढ़ सकते हैं।

Kuch lines yahan khwabon mein khoye rehne ki chaahat mein alarm ko jagne ka nahi, sone ka zariya bana deti hain. Poora collection Quotes aur Ham shayari mein bhi dekhein.