काट बैठा हूँ अपने हाथ की नब्ज़ को
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काट बैठा हूँ अपने हाथ की नब्ज़ को,
शायद तुम निकल जाओ दिल से खून के जरिये
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काट बैठा हूँ अपने हाथ की नब्ज़ को,
शायद तुम निकल जाओ दिल से खून के जरिये
Kaat baitha hoon apane haath kee nabz ko,
Shaayad tum nikal jao dil se khoon ke jariye
