साँसों की सीडियों से उतर आई जिंदगी
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साँसों की सीडियों से उतर आई जिंदगी
बुझते हुए दिए की तरह, जल रहे हैं हम
उम्रों की धुप, जिस्म का दरिया सुखा गयी
हैं हम भी आफताब, मगर ढल रहे हैं हम
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साँसों की सीडियों से उतर आई जिंदगी
बुझते हुए दिए की तरह, जल रहे हैं हम
उम्रों की धुप, जिस्म का दरिया सुखा गयी
हैं हम भी आफताब, मगर ढल रहे हैं हम
Saanson ki seediyon se utar aayi jindgee
Bhujte hue diye ki tarah jal rahe hain hum
Umron ki dhuo, jisam ka dariya shukh gayi
Hain hum bhi aaftaab, magar dhal rahe hain hum
