बटुए को कहाँ मालूम पैसे उधार के हैं
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बटुए को कहाँ मालूम पैसे उधार के हैं...
वो तो बस फूला ही रहता है अपने गुमान में।।
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बटुए को कहाँ मालूम पैसे उधार के हैं...
वो तो बस फूला ही रहता है अपने गुमान में।।
Batue ko kahaan maaloom paise udhaar ke hain...
Vo to bas phoola hee rahata hai apane gumaan mein..
