Logo - Feel The Words

Bebaak Shayari

Dahshat ke bina hak ki baat bebaaki se kehne ka jazba jagati shayari.

Bebaak shayari mein saaf kaha gaya hai ki jo bhi baat kehni ho, bebaaki se kaho, kyunki dahshat ke saaye mein hak ki himayat kabhi nahi hoti. Isi jazbe mein Hak shayari bhi padhein.

Bebaak Shayari - Bina Dar Sach Kehne Wale Sher
कहनी हो जो भी बात बेबाक कहा कर

कहनी हो जो भी बात बेबाक कहा कर...
दहशत के साथ हक़ की हिमायत नही होती...!!

Kahanee ho jo bhee baat bebaak kaha kar...
Dahashat ke saath haq kee himaayat nahee hotee...!!

Read more...

Frequently Asked Questions

निडर होकर सच बोलने की सीख बेबाक शायरी में कैसे दी गई है?
एक साहसिक पंक्ति में कहा गया है, ‘कहनी हो जो भी बात बेबाक कहा कर... दहशत के साथ हक़ की हिमायत नही होती...!!’ यह पंक्ति सिखाती है कि जो भी कहना हो, निडर होकर कहना चाहिए, क्योंकि डर के साये में सच्चाई और हक़ की बात नहीं की जा सकती।
‘दहशत के साथ हक़ की हिमायत नहीं होती’ पंक्ति का गहरा संदेश क्या है?
यह पंक्ति दर्शाती है कि सच्चाई और अधिकार की लड़ाई तभी सार्थक होती है जब वह भय से मुक्त होकर लड़ी जाए। भय और साहस साथ-साथ नहीं चल सकते - इससे जुड़े भाव Dahshat और Hak शायरी में विस्तार से मिलते हैं।

Yeh sher sach bolne ke sahas ko darshata hai, jo bina dare apni baat rakhne walon ke dil ko awaaz deta hai. Aage 2 Line aur Saath shayari bhi padhein.