कलम के कीड़े हैं हम जब भी मचलते हैं
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कलम के कीड़े हैं हम जब भी मचलते हैं,
खुरदुरे कागज पे रेशमी ख्वाब बुनते हैं।
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कलम के कीड़े हैं हम जब भी मचलते हैं,
खुरदुरे कागज पे रेशमी ख्वाब बुनते हैं।
Kalam ke keede hain ham jab bhee machalate hain,
Khuradure kaagaj pe reshamee khvaab bunate hain.
