अगर तुम्हें भूलाना मुमकिन होता तो कब के भूला दिये होते
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अगर तुम्हें भूलाना मुमकिन होता तो कब के भूला दिये होते
यूँ पैंरो में मोच होते हुए भी चलना किसको पसन्द है
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अगर तुम्हें भूलाना मुमकिन होता तो कब के भूला दिये होते
यूँ पैंरो में मोच होते हुए भी चलना किसको पसन्द है
Agar tumhen bhoolaana mumakin hota to kab ke bhoola diye hote
Yoon painro mein moch hote hue bhee chalana kisako pasand hai
Today's Shayari
इल्ज़ाम तो हर हाल में काँटों पे ही लगेगा,
ये सोचकर अक्सर फूल भी चुपचाप ज़ख्म दे जातें हैं !
Today's Joke
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Life is like a book. Each day like a new page. So let the first words you write be Good...
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