काश आदमी के गिरने की हद भी तय होती
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काश आदमी के गिरने की हद भी तय होती,,,
तो बेटियाँ इस मुल्क की शायद महफूज़ होतीं...
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काश आदमी के गिरने की हद भी तय होती,,,
तो बेटियाँ इस मुल्क की शायद महफूज़ होतीं...
Kaash aadamee ke girane kee had bhee tay hotee,,,
To betiyaan is mulk kee shaayad mahaphooz hoteen...
