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Roya Shayari

Kabhi khushi ke aansoo, kabhi vridha-ashram ka dard.

Roya shayari mein beta ki tarakki dekh kar baap ki aankhon mein aansoo aa jaate hain, magar vridha-ashram mein use milne aana hi ek sacchai ban jaata hai. Isi bhaav mein Beta shayari bhi padhein.

देख बेटे की तरक्की को बाप भी रोया होगा,
वृद्धा-आश्रम में मिलने पिता से बेटा आया होगा।

Dekh bete kee tarakkee ko baap bhee roya hoga,
Vrddha-aashram mein milane pita se beta aaya hoga.

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वो बड़े ऊन के गोले, माँ ने जिनसे सुनहरे वक्त को
पिरोया था कभी, अब सर्द नवंबर में याद आते हैं..!!

Vo bade oon ke gole, maan ne jinase sunahare vakt ko
Piroya tha kabhee, ab sard navambar mein yaad aate hain..!!

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तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलकों पर,
जब भीग कर कहती है की अब रोया नहीं जाता।

Taras aata hai mujhe apanee maasoom see palakon par,
Jab bheeg kar kahatee hai kee ab roya nahin jaata.

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मैने एहसास के धागे में पिरोया है तुझे...
टूट अगर हम गये तो बिखर तुम भी जाओगे...!!

Maine ehasaas ke dhaage mein piroya hai tujhe...
Toot agar ham gaye to bikhar tum bhee jaoge...!!

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2 Line Shayari

थक कर मुस्कुरा देती हूँ ,
जब रोया नहीं जाता ...!!

Thak kar muskura detee hoon ,
Jab roya nahin jaata ...!!

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Frequently Asked Questions

क्या Roya टैग की सभी शायरियों में 'रोया' शब्द रोने के अर्थ में ही आता है?
नहीं, पूरी तरह नहीं। इस संग्रह में कुछ शायरियों में 'रोया' शब्द असल में 'पिरोया' (धागे में पिरोना) शब्द का हिस्सा है, रोने से इसका कोई सीधा संबंध नहीं, जैसे: "वो बड़े ऊन के गोले, माँ ने जिनसे सुनहरे वक्त को पिरोया था कभी, अब सर्द नवंबर में याद आते हैं..!!" — यह पारदर्शिता से बताया जा रहा है ताकि पाठक असली सामग्री को सही संदर्भ में समझ सकें।
बेटे की तरक्की देखकर बाप के रोने और वृद्धाश्रम में बेटे के मिलने आने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"देख बेटे की तरक्की को बाप भी रोया होगा, वृद्धा-आश्रम में मिलने पिता से बेटा आया होगा।" — यह शायरी बेटे की तरक्की देखकर बाप के भावुक होकर रोने और उसके वृद्धा-आश्रम में पिता से मिलने आने पर एक गहरा तंज़ कसती है।
मासूम पलकों के भीग कर भी रोया न जाने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलकों पर, जब भीग कर कहती है की अब रोया नहीं जाता।" — यह शायरी उन मासूम सी पलकों पर तरस खाती है जो भीग कर भी यह कहती हैं कि अब रोया नहीं जाता।
एहसास के धागे में पिरोकर साथ टूटने पर बिखर जाने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"मैने एहसास के धागे में पिरोया है तुझे... टूट अगर हम गये तो बिखर तुम भी जाओगे...!!" — यह शायरी कहती है कि एहसास के धागे में पिरोए होने के कारण अगर हम टूटे, तो तुम भी बिखर जाओगे।
Roya से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप 2 Line, Beta, Dua और Ghar शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan sardi ke November mein maa ke bunaye oon ke golon ki yaad dilata hai, to doosra thak kar muskurane ki majbooree bayaan karta hai jab rona bhi nahi aata. Aage Ghar aur Dua shayari bhi padhein.