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Lahoo Shayari

Shaheedon ka lahoo kabhi bekar nahi jaata.

Lahoo shayari mein shaheedon ke balidan aur tirange ki hifazat ke liye diye gaye lahoo ki baat hoti hai. Isi jazbe mein Azadi shayari bhi padhein.

Lahoo Shayari - Shaheedon Ke Balidan Ke Sher
चलो फिर से खुद को जगाते हैं

चलो फिर से खुद को जगाते हैं,
अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं,
सुनहरा रंग हैं गणतंत्र का,
शहीदों के लहूँ से,
ऐसे शहीदों को हम सर झुकाते हैं.

Chalo phir se khud ko jaate hain,
Anushasan ka danda phir ghumaate hain,
Sunahara rang hain ganatantr ka,
Shaheedon ke lahoon se,
Aise shaheedon ko ham sar jhukaate hain.

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आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची हो जो एक बूंद भी लहू की
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

Aajaadee kee kabhee shaam nahin hone denge
Shaheedon kee kurbaanee badanaam nahin hone denge
Bachee ho jo ek boond bhee lahoo kee
Tab tak bhaarat maata ka aanchal neelaam nahin hone denge

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इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना

इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना
रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना
लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने
ऐसे तिरंगे को हमेशा दिल में बसाये रखना

Itanee see baat havaon ko bataaye rakhana
Raushanee hogee chiraagon ko jalaaye rakhana
Lahoo dekar kee hai jisakee hiphaajat hamane
Aise tirange ko hamesha dil mein basaaye rakhana

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लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा

लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा.

Likh raha hoon main anjaam, jiska kal aagaaj aaega,
Mere lahoo ka har ek katara inkalaab laega.

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Aag Shayari

आके गिरा था एक परिन्दा लहू में तर..
तस्बीर अपनी छोड़ गया है चटान पर..

Aake gira tha ek parinda lahoo mein tar..
Tasbeer apanee chhod gaya hai chataan par..

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ऐ मेरे पाँव के छालों, ज़रा लहू उगलो..,
सिरफिरे मुझसे सफ़र के निशान माँगेगे..!!

Ai mere paanv ke chhaalon, zara lahoo ugalo..,
Siraphire mujhase safar ke nishaan maangege..!!

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Frequently Asked Questions

गणतंत्र के सुनहरे रंग को शहीदों के लहू से जोड़ते हुए उन्हें सर झुकाने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"चलो फिर से खुद को जगाते हैं, अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं, सुनहरा रंग हैं गणतंत्र का, शहीदों के लहूँ से, ऐसे शहीदों को हम सर झुकाते हैं." — यह देशभक्ति शायरी गणतंत्र के सुनहरे रंग को शहीदों के लहू से जोड़ते हुए ऐसे शहीदों के सामने सर झुकाने की बात कहती है।
तिरंगे की हिफाजत लहू देकर करने और उसे हमेशा दिल में बसाए रखने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने ऐसे तिरंगे को हमेशा दिल में बसाये रखना" — यह देशभक्ति शायरी कहती है कि लहू देकर जिस तिरंगे की हिफाजत की गई है, उसे हमेशा दिल में बसाए रखना चाहिए।
शहीदों की कुर्बानी को बदनाम न होने देने और भारत माता के आँचल की रक्षा की कसम खाने वाली शायरी कौन सी है?
"आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे" — यह देशभक्ति शायरी आज़ादी की कभी शाम न होने देने और शहीदों की कुर्बानी को बदनाम न होने देने की कसम खाती है, जब तक लहू की एक बूंद भी बची है।
लहू के हर कतरे से आने वाले कल में इंकलाब लाने का अंजाम लिखने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा." — यह शायरी कहती है कि लिखे जा रहे अंजाम का आगाज़ कल होगा, और लहू का हर कतरा इंकलाब लाएगा।
लहू से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Desh Bhakti, Bhaarat और Azadi शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan yeh bhi kehta hai ki lahoo ka har katra ek naye inquilab ki shuruaat karta hai. Aage Bhaarat aur Aag shayari bhi padhein.